नई दिल्ली, (वार्ता) तेल एवं गैस क्षेत्र की प्रमुख कंपनी केयर्न ऑयल एंड गैस ने कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन में गहरे पानी में हाइड्रोकार्बन की खोज के लिए नॉर्वे की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक जियोसर्विसेज़ (ईएमजीएस) के साथ साझेदारी की है।
कंपनी ने शुक्रवार को बयान जारी कर बताया कि यह साझेदारी केयर्न के पूर्वी तट स्थित अपतटीय ब्लॉक केजीडीडब्ल्यूएचपी-2017/1 में 3डी कंट्रोल्ड सोर्स इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सर्वेक्षण कराने के लिए की गई है। यह तकनीक उपसतही प्रतिरोधकता को मैप करके हाइड्रोकार्बन की पहचान की सटीकता बढ़ाने में मदद करती है।
ईएमजीएस का पोत ‘अटलांटिक गार्जियन’ इस समय “डीप ब्लू” स्रोत प्रणाली का उपयोग करके सर्वेक्षण के लिए डेटा एकत्र कर रहा है। यह डेटा हाल ही में पुनः संसाधित 3डी भूकंपीय (सीस्मिक) डेटा के साथ मिलाकर केजी ब्लॉक में संभावनाओं की पहचान करने, उन्हें प्राथमिकता देने और उपसतही मॉडल को और अधिक सटीक बनाने में मदद करेगा। यह प्रक्रिया अन्वेषण जोखिम को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
केयर्न ऑयल एंड गैस के मुख्य वित्तीय अधिकारी हितेश वैद ने कहा, “कंपनी भारत के अपस्ट्रीम क्षेत्र में तकनीक के उपयोग में अग्रणी रही है और ईएमजीएस के साथ यह सहयोग देश के तेल और गैस उत्पादन में 50 प्रतिशत योगदान देने के उनके विजन को मजबूती देगा।”
कंपनी के मुख्य अन्वेषण अधिकारी सैम एल्गर ने कहा कि यह डेटा न केवल ड्रिलिंग निर्णयों को अधिक वैज्ञानिक और सटीक बनाएगा बल्कि ब्लॉक की हाइड्रोकार्बन क्षमता को प्रभावी रूप से दोहन करने में भी मदद करेगा।
उल्लेखनीय है कि मार्च 2025 में केयर्न ने गहरे पानी की परियोजनाओं के लिए उप-सागर बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित करने के लिए एक वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी के साथ रणनीतिक गठबंधन किया था। केयर्न के पास केजी बेसिन में 4500 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाला अपतटीय ब्लॉक है, जिसमें जल की गहराई 500 मीटर से 2500 मीटर तक है। कंपनी वर्ष 2026 में 3600 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में ड्रिलिंग शुरू करने की योजना बना रही है, जिसमें अब तक चार गैस खोजें हो चुकी हैं और कई और संभावनाएं मौजूद हैं।
