(यश पाठक) भोपाल। आवारा कुत्तों का शहर में खौफ इस कदर बढ़ गया है कि अब लोगों की जान पर बन आई है। बीते 8 दिन पहले एक युवक की मौत आवारा कुत्ते के काटने से हो गई। यह घटना राजधानी की सड़कों पर घूमते बेखौफ कुत्तों के खतरे की भयावह तस्वीर पेश करती है। इस त्रासद घटना के बावजूद आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने की कोई कार्ययोजना नहीं दिख रही है। शहर की सड़कें, गलियां और मोहल्ले आज आवारा कुत्तों के झुंड से पटे पड़े हैं। ये कुत्ते न केवल राहगीरों पर भौंकते और गुर्राते हैं, बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए एक बड़ा खतरा बन गए हैं। आए दिन कुत्ते के काटने की घटनाएं सामने आती रहती हैं, सुबह और शाम के समय, जब बच्चे स्कूल जाते हैं या लोग टहलने निकलते हैं, तो इन आवारा कुत्तों का सामना करना एक आम बात हो गई है। कई बार ये कुत्ते झुंड में हमलावर हो जाते हैं, जिससे गंभीर चोटें आती हैं।
शहर में न तो आवारा कुत्तों को पकडऩे के लिए कोई विशेष अभियान चलाया जा रहा है और न ही उनके नियंत्रण के लिए कोई ठोस योजना बनाई जा रही है।
इधर, बीएमसी ने शहर में एक साल में करीब 19 हजार 489 कुत्तों की नसबंदी की है। पिछले साल 18 हजार 497 कुत्तों की नसबंदी की गई थी। दो साल में 37 हजार 986 कुत्तों की नसबंदी हो चुकी है और इस नसबंदी कार्यक्रम में सवा चार करोड़ खर्च हो चुके हैं। जबकि बीएमसी के पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में 55,000 से अधिक आवारा कुत्तों की नसबंदी की गई। शहर में प्रतिदिन कुत्तों से संबंधित 15-20 शिकायतें आती हैं, कुत्तों के काटने की लगातार रिपोर्टें आती हैं।
इनका कहना है
शिकायतों के आधार पर निगम कार्य करती है जिस इलाके से कुत्तों को लेके काटने की या रात के समय शोर करने जैसी शिकायतों पर निगम उस इलाके में अभियान चलती है और कुत्तों को पकड़ती है.
हरी राव,डॉग कैचर, विभाग अधिकारी नगर निगम भोपाल
