बच्चों की गुमशुदगी पर चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बद से बदतर होती जा रही है’

नयी दिल्ली, 21 अप्रैल (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि बाल तस्करी की “स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने द्वारका क्षेत्र में कई नवजात शिशुओं की तस्करी के मामले में सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं।

पीठ ने जांच कर रही दिल्ली पुलिस के एक निरीक्षक से कई सवाल किए और आवश्यक निर्देश दिए। उसने दिल्ली पुलिस से राष्ट्रीय राजधानी में बाल तस्करी के रैकेट के पीछे एक आरोपी को गिरफ्तार करने के बारे में जानकारी मांगी।

न्यायालय ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिशुओं के माता-पिता ने अपने ही बच्चों को बेच दिया है। शिशुओं की तस्करी में माता-पिता की कथित संलिप्तता को गंभीरता से लेते हुए पीठ ने कहा, “स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।”

तस्करी किए गए बच्चों पर चिंता जताते हुए पीठ ने आगे कहा, “आप कभी नहीं जानते कि ये बच्चे कहां पहुंचेंगे। एक बालिका के मामले में, आप जानते हैं कि वह कहां पहुंचती है…”।

पीठ ने दिल्ली पुलिस को साफ तौर पर कहा कि उसे किसी भी कीमत पर इन लापता बच्चों को ढूंढना होगा और सरगना को गिरफ्तार करना होगा।

पीठ ने पुलिस अधिकारी से इस मामले में किए गए उपायों के बारे में जानकारी मांगी। साथ ही, पुलिस से कहा कि वह तीन लापता शिशुओं का ढूंढे और गिरोह की सरगना पूजा गिरफ्तार करे।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की।

दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने किया।

शीर्ष अदालत ने गत 15 अप्रैल को एक अन्य मामले में अंतरराज्यीय बाल तस्करी रैकेट के मुद्दे पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था।

शीर्ष अदालत ने उस मामले में 13 आरोपियों को दी गई जमानत रद्द कर दी थी। अदालत ने तब सभी राज्यों को बाल तस्करी और इससे उत्पन्न होने वाले अपराधों को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे।

अदालत के दिशा-निर्देश में कहा गया था कि निर्देशों को लागू करने में किसी भी तरह की ढिलाई को गंभीरता से लिया जाएगा और इसे अदालत की अवमानना ​​माना जाएगा।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की।

दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने किया।

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