भोपाल। जेपी अस्पताल में फूडपॉइज़निंग के मरीज़ों की भरमार लग गई है, बीते लगातार 3 दिनों के शासकीय अवकाश के दरम्यान भी करीब 450 से ज्यादा मरीज़ों का रजिस्ट्रेशन हुआ. गौरतलब है, कि 100 से ज्यादा मरीज़ पेट खराब होने और उल्टी, दस्त के आए थे इस माह के शुरुआत से अभी तक कुल 300 से ज्यादा मरीज़ उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच चुके है. जिसके कारण अस्पताल का बाल चिकित्सा गहन देखभाल इकाई (पीआईसीयू) खचा-खच भर चूका है. वही अस्पताल प्रशासन ने फिर भी 5 बेड आपातकाल केस के लिए बाकी छोड़ रखे है. जेपी अस्पताल के बच्चा वार्ड में 16 और पीआईसीयू में 10 बेड हैं। जिसमें वर्तमान में 25 बच्चे भर्ती हैं। और 3 बच्चे निमोनिया से जूझ रहे है.
जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि गर्म मौसम में साल्मोनेला, ई. कोलाई और लिस्टेरिया जैसे बैक्टीरिया ज्यादा तेजी से पनपते हैं, जिससे खाना जल्दी खराब होता है। इससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी में स्ट्रीट फूड भी फूड पॉयजनिंग का बड़ा कारण बन रहा है।उन्होंने बताया फूड पॉइजनिंग सिर्फ पेट खराब होने की समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर वैश्विक बीमारी है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, हर साल करीब 60 करोड़ लोग (दुनिया में हर 10 में से 1 व्यक्ति) दूषित भोजन खाने से बीमार पड़ते हैं। इनमें से 4 लाख की मौत हो जाती है। हर साल 5 साल से कम उम्र के 1.25 लाख बच्चों की मौत फूड पॉइजनिंग के कारण हो जाती है।
फ़ूड पॉइजनिंग के लक्षण
24 घंटे से अधिक उल्टी होना ,3 दिन से ज्यादा दस्त रहना,उल्टी या मल में खून आना, 40 डिग्री या उससे अधिक बुखार होना (गंभीर डिहाइड्रेशन) ,चक्कर आना, कमजोरी, बेहोशी जैसा महसूस होना, यह सभी लक्षण फ़ूड पॉइजनिंग के हो सकते है.
फ़ूड पॉइजनिंग से बचाव
घर का बना ताजा और गर्म खाना ही खाएं जितना हो सके बाहर का तला हुआ खाना ना खाए इसके अलावा बाहर के सलाद, बर्फ का गोला या कटे फल भी ना खाएं और पीना का पानी उबालकर या आरओ का पीएं ख़ास तौर पर बच्चों के को पैक्ड जूस और आइसक्रीम से दूर रखें।
