
पेरिस, 10 अप्रैल (वार्ता) फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि उनका देश आगामी जून तक फिलिस्तीन राष्ट्र को मान्यता दे सकता है।
श्री मैक्रों ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह-अल सीसी और जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला के साथ गाजा युद्ध पर व्यापक बातचीत करने के लिए हाल ही में मिस्र की राजधानी काहिरा की यात्रा की है। उन्होंने फ्रांस 5 टेलीविजन को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “हमें फिलिस्तीन राष्ट्र की मान्यता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए और हम आने वाले महीनों में ऐसा करेंगे। मैं किसी को खुश करने के लिए ऐसा नहीं कर रहा हूं, लेकिन मुझे लगता है कि ऐसा करने का यह सही समय है।”
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा, “और क्योंकि मैं एक सामूहिक गतिशीलता में भी भाग लेना चाहता हूं, जिससे फिलिस्तीन का बचाव करने वाले देश इजरायल को मान्यता दें, क्योंकि उनमें से कई ऐसा नहीं कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य जून में सऊदी अरब के साथ इस सम्मेलन की अध्यक्षता करना है, जहां हम कई पक्षों द्वारा पारस्परिक मान्यता (फिलिस्तीनी राष्ट्र की) के इस आंदोलन को अंतिम रूप दे सकते हैं।” फिलिस्तीन को हालांकि, लगभग 150 देशों द्वारा एक संप्रभु देश के रूप में मान्यता दी गयी है, लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और जापान सहित अधिकांश प्रमुख पश्चिमी शक्तियों ने इसे मान्यता नहीं दी है। इजरायल को मान्यता नहीं देने वाले देशों में सऊदी अरब, ईरान, इराक, सीरिया और यमन शामिल हैं।
श्री मैक्रों के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए फिलिस्तीनी विदेश मामलों की राज्य मंत्री अगाबेकियान शाहीन ने कहा कि फ्रांस की मान्यता सही दिशा में एक कदम होगा और फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों की रक्षा करेगा। इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि कोई भी एकतरफा मान्यता हमास के लिए बढ़ावा होगी।
उल्लेखनीय है कि फ्रांस लंबे समय से इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष के लिए दो-राष्ट्र समाधान की वकालत करता रहा है।
