
कुक्षी। मालवा निमाड़ के प्रमुख त्यौहार गणगौर महोत्सव के दौरान गुरुवार शाम को शहर के हृदय स्थल कचहरिया चौक में ऐसा नजारा लगा जैसे मानो झीलमिलाते हुए चांद-सितारे आसमान से जमीन पर उतर आए हो।शाम ढलते ही क्षत्रिय सिर्वी समाज द्वारा विशेष एवं मनमोहक रूप से श्रृंगारित 200 गणगौर माता के रथों का चल समारोह श्री आई माताजी मंदिर से शुरू होकर प्रमुख मार्ग सराफा बाजार होते हुए जवाहर चौक पहुंचा। पूरा बाजार खचाखच लोगों से भरा हुआ था। लोग आकर्षक नृत्य देखने आतुर दिखाइ दे रहे थे। जहां एक साथ महिलाओं ने अपने सिर पर गणगौर रथों को रखकर नृत्य किया। वहीं लोक संस्कृति की अनुपम छटा दिखाई दी। अंचल के कई गांव से हजारों श्रद्धालु इस नृत्य को देखने एकत्रित हुए।
जवाहर चौक के साथ आसपास के भवन श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भरे हुए थे लोग अपने-अपने मोबाइल की फ्लैश लाइट चालू कर इन यादगार पलो को कैमरे में कैद करते नजर आए। ऐसा मनोहारी गणगौर नृत्य मानो आसमान से देवता जमीन पर आकर नृत्य कर रहे हो।
उधर,गणगौर महोत्सव के दौरान किसान एवं मजदूर वर्ग अपने दैनिक कृषि एवं मजदूरी कार्य को बंद रखकर आस्था के इस पर्व में श्रद्धा भाव से डूबे रहे।
रात्रि में सीरवी समाज द्वारा श्री आई माता मंदिर, बड़ी हताई और नेनकी हताई में पारंपरिक झलारिया एवं रतजगा किया गया। गणगौर महोत्सव की रंगत को देखने के लिए कुक्षी तहसील के विभिन्न ग्रामों के अलावा अन्य जगहों से भी श्रद्धालुओं का तांता नगर में लगा रहा। गणगौर पर्व को सीरवी बहुल ग्रामों में तो पारंपरिक रूप से मनाने के कारण वहां पर इस पर्व की रंगत रही, परंतु तहसील के अधिकांश ग्रामों में विभिन्न समुदाय के लोग इस पर्व की रंगत निहारने से वंचित नहीं रहे यही वजह रही कि ग्रामीण क्षेत्र का हुजूम भी गणगौर नृत्य को देखने शहर में उमर पड़ा।
इधर,
पोरवाड़ समाज द्वारा गणगौर पर्व परम्परागत उल्लास के साथ मनाया। दाताहरी मंदिर में माताजी के पूजन के बाद रथ नगर भ्रमण करते हुए डीपीएस पहुँचे जहाँ महिलाओं ने रनुबाई व धनियर राजा के रथों से माहौल आस्था व भक्ति से सराबोर हो गया।
