नयी दिल्ली 27 मार्च (वार्ता) केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार पर बंगलादेश से घुसपैठ करके आने वाले घुसपैठियों को आधार कार्ड एवं मतदाता पहचान पत्र जारी करने का आज आरोप लगाया और दावा किया कि अगले वर्ष विधानसभा चुनावों में वहां भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी और तभी इस घुसपैठ का अंत होगा।
श्री शाह ने लोकसभा में ‘आप्रवास और विदेशियों विषयक विधेयक 2025’ में हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि घुसपैठिये पश्चिम बंगाल से घुसकर आते हैं। आधार कौन देता है। देश में जितने बंगलादेशी घुसपैठिये पकड़े गये हैं वे सब 24 परगना जिले के रहने वाले हैं। आप आधार कार्ड और वोटर कार्ड देते हैं, वो ही लेकर ये सब पूरे देश में जाते हैं। आप उन्हें जारी करना बंद करें तो घुसपैठ बंद हो जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में पश्चिम बंगाल में कमल खिल जाएगा और यह घुसपैठ पूरी तरह से बंद हो जाएगी।
गृह मंत्री के इस बयान पर तृणमूल कांग्रेस एवं कांग्रेस के सदस्य शोर शराबा करने लगे।
श्री शाह ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान वह इस मुद्दे पर देश के हित के लिए चुप रहे। लेकिन वह आज खुल कर कहना चाहते हैं कि ये (पश्चिम बंगाल की) 450 किलोमीटर की खुली सीमा है। वहीं से घुसपैठ हो रही है। वहीं से आधार कार्ड और वोटर कार्ड बनाये जाते हैं और वहीं से ये देश भर में फैल जाते हैं।
श्री शाह ने कहा कि एक सदस्य ने पासपोर्ट रैंकिंग में भारत का स्थान 50 वां है तो ऐसा कोई सर्वेक्षण नहीं हुआ है। किसी एनजीओ का कोई सर्वे है। श्री राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद सरकार की बजाय एनजीओ के आंकड़े दिये जा रहे हैं।
गृहमंत्री ने कहा कि द्रमुक की सांसद कनिमोझी ने तमिल शरणार्थियों का मुद्दा उठाया है। उन्होंने पूछा है कि तमिल शरणार्थियों को लेकर सरकार की क्या नीति है। इस पर वह बताना चाहते हैं कि तमिल शरणार्थियों को लेकर उनका दिल भी उतना ही दुखता है जितना सुश्री कनिमोझी का। जहां तक सरकार की नीति का सवाल है तो मोदी सरकार उसी नीति पर चल रही है तो 1990 के दशक में थी और दस वर्ष तक संप्रग के शासनकाल में थी।
उन्होंने कहा, “हमें लगा कि आप अपनी सरकार में जिस नीति पर चल रहे थे, वह सही होगी। इसलिए हमने उसे नहीं बदला। यदि आप बदल देते तो हमसे बदलाव करने को नहीं कहना पड़ता। फिर भी यदि आपको लगता है कि इसमें कोई बदलाव होना चाहिए तो हमें बताइए। हम जरूर बदल देंगे।”
उन्होंने कहा कि द्रमुक के नेता हमसे चार बार मिल चुके हैं और एक बार भी तमिल शरणार्थियों का मुद्दा नहीं उठाया। बाहर आकर बयान देते हैं।
गृह मंत्री ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के बारे में कहा कि आजादी के वक्त जब आनन फानन में बंटवारा हुआ तो बहुत खूनखराबा हुआ था। लोगों को काट कर लाशें ट्रेनों में लाद कर भेजा गया तो उस समय हमारे नेताओं ने कहा था कि जो जहां है, वहीं रहे। बाद में आ जाएंगे तो उनका स्वागत किया जाएगा। वे लोग अपने धर्म को बचाने और अपने परिवार की महिलाओं की इज्जत बचाने के लिए तथाकथित घुसपैठ करके आये। हमारी नज़र में वे वास्तविक शरणार्थी हैं, घुसपैठिये नहीं। उनके लिए ही हम सीएए लाये हैं। हिन्दू, जैन, सिख, बौद्ध, ईसाई, पारसी आदि जो भी आये हैं, जिन पर अत्याचार हुआ है, उनका स्वागत है। जो घुसपैठ करके किसी और मकसद से आएंगे, उनका स्वागत नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि चार कानूनों के स्थान पर आप्रवास और विदेशी विषयक विधेयक 2025 लाये हैं। उन चारों कानूनों की कमियों को दूर करने का प्रयास किया गया है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है। लेकिन देश की सुरक्षा को ध्यान में रखा गया है।
