जम्मू-कश्मीर पुलिस की प्रतिबंधित संगठनों पर कार्रवाई, अलगाववादी नेताओं के आवासों पर छापे

श्रीनगर, 26 मार्च (वार्ता) जम्मू-कश्मीर पुलिस ने प्रतिबंधित संगठनों पर कार्रवाई के तहत बुधवार को हुर्रियत के एक पूर्व अध्यक्ष समेत कई शीर्ष अलगाववादी नेताओं के आवासों पर छापे मारे।

यह छापेमारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा यह कहे जाने के एक दिन बाद की गई कि कश्मीर में अलगाववाद अतीत की बात हो गई है, क्योंकि दो हुर्रियत नेताओं ने अलगाववादी गतिविधियों से खुद को अलग कर लिया है।

पुलिस ने आज गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामलों के सिलसिले में श्रीनगर और सोपोर में कई स्थानों पर व्यापक छापेमारी की। ये मामले प्रतिबंधित संगठनों से संबंधित हैं, जिनमें जम्मू-कश्मीर मुस्लिम कॉन्फ्रेंस (भट ग्रुप), जम्मू-कश्मीर मुस्लिम लीग (मसरत आलम ग्रुप) और जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी (शब्बीर शाह ग्रुप) शामिल हैं।

ये छापे इन प्रतिबंधित संगठनों में संलिप्तता के संदिग्ध व्यक्तियों को लक्षित करके मारे गए तथा श्रीनगर के विभिन्न पुलिस थानों में पिछले वर्ष दर्ज कई मामलों की जांच को आगे बढ़ाने के लिए मारे गए।

पुलिस के अनुसार हुर्रियत के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर अब्दुल गनी भट के बोटिंगू, सोपोर स्थित आवास और राजबाग के वजीर बाग स्थित उनके श्रीनगर आवास पर छापेमारी की गई। जेल में बंद अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह के आवास पर भी छापेमारी की गई।

इसके अलावा, पुलिस ने श्रीनगर में सात स्थानों पर तलाशी ली, जिसमें कथित रूप से गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल लोगों को निशाना बनाया गया, जिनमें जेल में बंद नेता मसरत आलम भट और मुश्ताक अहमद भट उर्फ ​​गुग्गा साहब शामिल हैं।

पुलिस ने कहा कि श्रीनगर में एनआईए अधिनियम के तहत नामित विशेष न्यायाधीश से वारंट प्राप्त करने के बाद तलाशी ली गई। कानूनी प्रक्रियाओं के अनुपालन में, सभी छापे कार्यकारी मजिस्ट्रेट और स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में मारे गए।

पुलिस ने कहा, “जांच का उद्देश्य जम्मू और कश्मीर में अलगाववादी और आतंकवादी पारिस्थितिकी तंत्र के अवशेषों को नष्ट करना है, ताकि ऐसी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों की पहचान की जा सके और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।”

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