सेबी के पास सिर्फ दो फीसदी वित्तीय प्रभावशाली व्यक्ति पंजीकृत : रिपोर्ट

हैदराबाद, 24 मार्च (वार्ता) निवेश पेशेवरों के वैश्विक संगठन सीएफए इंस्टीट्यूट ने बताया कि पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास केवल दो प्रतिशत वित्तीय प्रभावशाली व्यक्ति (फिनफ्लुएंसर्स) पंजीकृत हैं।

सीएफए इंस्टीट्यूट की सोमवार को जारी रिपोर्ट ‘क्लिक्स एंड क्रेडिबिलिटी: अंडरस्टैंडिंग फिनफ्लुएंसर्स रोल इन इन्वेस्टमेंट डिसीजन’ के मुताबिक केवल दो प्रतिशत वित्तीय प्रभावशाली व्यक्ति ही सेबी के पास पंजीकृत हैं। यह रिपोर्ट भारत के खुदरा निवेश परिदृश्य में फिनफ्लुएंसर्स की बढ़ती भूमिका को समझने और उनके प्रभाव का विश्लेषण करने वाली पहली व्यापक अध्ययन है।

सीएफए ने कहा कि 1,600 से ज्यादा निवेशकों के सर्वे और 51 प्रमुख फिनफ्लुएंसर्स के गहन विश्लेषण पर आधारित यह रिपोर्ट फिनफ्लुएंसर्स के प्रभाव और जोखिमों को उजागर करती है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच सालों में भारत में इक्विटी बाजारों में खुदरा निवेशकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, सेबी के निष्कर्ष बताते हैं कि इनमें से कई निवेशक निवेश से ज्यादा सट्टेबाजी कर रहे हैं, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सेबी ने गैर-जिम्मेदार निवेश व्यवहार को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं, जैसे अवैध तरीके से फायदा उठाने वाले फिनफ्लुएंसर्स पर भारी जुर्माना लगाना। फिर भी, रिपोर्ट बताती है कि भारत में फिनफ्लुएंसर परिदृश्य को नियंत्रित करने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

सर्वे में शामिल 82 प्रतिशत फॉलोअर्स ने कहा कि उन्होंने फिनफ्लुएंसर्स की सलाह पर निवेश किया, जिसमें से 72 प्रतिशत को मुनाफा हुआ। लेकिन, जोखिम भी सामने आए। जैसे 40 साल से ऊपर के 14 प्रतिशत निवेशकों ने माना कि वे गलत या धोखाधड़ी वाली सलाह के शिकार हुए।

सीएफए इंस्टीट्यूट इंडिया की कंट्री हेड आरती पोरवाल ने कहा, “फिनफ्लुएंसर्स वित्तीय जागरूकता को व्यापक और प्रासंगिक बनाने में सक्षम हैं लेकिन जिम्मेदार व्यवहार और सूचित निर्णय जरूरी हैं। निवेशकों को सेबी-पंजीकृत सलाहकारों से मार्गदर्शन लेना चाहिए और फिनफ्लुएंसर्स की साख जांचनी चाहिए।” उन्होंने एक भरोसेमंद वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए पारदर्शिता और सहयोग पर जोर दिया।

रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि 21-25 साल के युवा निवेशक अनियमित रूप से बचत के लिए निवेश करते हैं जबकि बड़े निवेशक मासिक निवेश पैटर्न अपनाते हैं। युवा कम ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म पसंद करते हैं, वहीं बुजुर्ग पूर्ण-सेवा ब्रोकरेज और व्यक्तिगत मार्गदर्शन पर भरोसा करते हैं। हालांकि, 63 प्रतिशत फिनफ्लुएंसर्स प्रायोजन या वित्तीय संबद्धता का खुलासा नहीं करते, जो चिंता का विषय है।

सीएफए इंस्टीट्यूट ने सेबी पंजीकरण को अनिवार्य करने, सोशल मीडिया पर पारदर्शिता बढ़ाने और निवेशक शिक्षा अभियानों की सिफारिश की है। यह रिपोर्ट भारत के बदलते निवेश परिदृश्य में फिनफ्लुएंसर्स के अवसरों और चुनौतियों से निपटने के लिए एक रोडमैप पेश करती है, जिसका लक्ष्य निवेशकों को सशक्त बनाना और वित्तीय सलाह की अखंडता को बनाए रखना है।

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