2 रुपए किलो में टमाटर बिक रहा इस लिए मवेशियों को खिला रहे किसान

शाजापुर। टमाटर की खेती से लाभ की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को टमाटर की लाली महंगी पड़ रही है. जिन्हें लाभ तो दूर उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है. किसानों की मानें तो इस बार मौसम की मेहरबानी से यह हाल हुए हैं. मंडी में प्रतिदिन हजार कैरेट टमाटर आ रहा है, जिसमें से केवल 400 से 500 कैरेट माल की ही बिक्री हो पा रही है. शेष माल को या तो वे मवेशियों को खिला रहे हैं या उसे वापस लेकर जा रहे हैं. इस बार मौसम साफ होने से जिले भर में टमाटर की आवक काफी ज्यादा हुई है. जिसके चलते इसके भाव जमीन पर आ गए हैं. इन दिनों टमाटर 2 से 6 रुपए किलो में बिक रहा है. किसानों ने बताया कि जिले के जामनेर, चाकरोद में टमाटर ज्यादा होता है, लेकिन इस बार कई जगह टमाटर की खेती काफी अच्छी हुई है, जिसके कारण टमाटर के यह हाल हैं. थोक में टमाटर के भाव 2 से 6 रुपए तो खेरची में इसके दाम आठ से दस रूपए किलो ही मिल पा रहे हैं. जिले में 6 हजार हैक्टेयर में टमाटर की खेती की जा रही है. एक हैक्टेयर में टमाटर तीन सौ क्विंटल से ज्यादा पैदा होता है. टमाटर की आवक बढऩे पर इसके दाम घट जाते हैं. किसान अनोखीलाल प्रजापति ने बताया इस समय टमाटर की आवक ज्यादा होने से भाव बहुत कम हैं. किसानों की उत्पादन लागत भी नहीं निकल रही. एक बीघा के टमाटर पैदा करने के लिए 15 हजार रुपए से ज्यादा खर्च होते हैं. मंडी में एक हजार केरट टमाटर बिकने के लिए आ रहा है, जिसमें से आधा केरट माल ही बिक रहा है. शेष बचे माल को किसान मवेशियों को खिला रहे हैं.

कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीआर अंबावतिया ने बताया कि शाजापुर जिले में भी बड़ी मात्रा में टमाटर का उत्पादन किया जाता है. इस समय उत्पादन ज्यादा होने से किसानों को टमाटर का भाव नहीं मिल पा रहा है. हर साल इस समय टमाटर के भावों में गिरावट रहती है. एक हेक्टेयर में टमाटर तीन सौ क्विंटल से ज्यादा पैदा होता है. टमाटर की पैदावार अच्छी होती है. इसके अलावा राजस्थान के अलवर से भी टमाटर यहां पहुंचता है.

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