पुनीत दुबे
इटारसी:आपको यह बात सुनने में शायद कुछ अटपटी लगे किंतु यह सत्य है। हम बात कर रहे हैं शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर गुर्रा गांव की जहां पर हर वर्ष रंग पंचमी के दिन भूतों की बारात बाकायदा बैंड बाजों के साथ निकलती है। यह सिलसिला यही खत्म नहीं होता बारात के बाद सभी भूतों की होली जलाई जाती है इसके पीछे मान्यता है कि यह बाधा अब किसी को परेशान नहीं करेगी।भूतों की बारात ओर होली का यह सिलसिला लगभग 35 वर्षों से अनवरत जारी है।
इटारसी शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर गुर्रा गांव में सर्वधर्म सद्भाव का संदेश देने वाले धार्मिक स्थान पर पीर बाबा की मजार के पास ही शिवलिंग भी स्थापित है। मंदिर के मुखिया रिखीराम कहार बताते हैं कि जब है 12 वर्ष के थे तब उनके परिवारजन किसी परेशानी के चलते उन्हें खंडवा के पास स्थित सैलानी बाबा की मजार पर लेकर गए थे वहां से वह स्वस्थ हो गए लेकिन उसके बाद उन्होंने अपने अंदर एक ऐसी ताकत को महसूस किया कि वह लोगों की परेशानियों को दूर करने लगे इसके बाद स्थानीय लोगों ने गांव में ही एक स्थान पर मजार का निर्माण कर दिया। तब से लोग भूत प्रेत बाधा जैसी समस्याओं को लेकर उनके पास आने लगे। लोगों को आराम लगता गया और क्षेत्र मे स्थान की ख्याति की खेती नर्मदापुरम ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों में भी फैल गई । आलम यह है कि रंग पंचमी के दिन लगने वाले मेले में यहां प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र के शहरों से भी लोग शामिल होते हैं।
ऐसे निकलती हे भूतों की बारात
इस धार्मिक स्थान पर पूरे वर्ष भर प्रेत बाधाओं से ग्रसित लोग आते हैं। हर गुरुवार शुक्रवार को होने वाली बैठक में प्रेत बाधा से जुड़े लोगों के सर से एक बंधन उतार उसे पास ही लगी एक जाली में बांध दिया जाता है। रंग पंचमी के दिन सुबह बाकायदा गांव से एक बारात निकलती है जिसमें प्रेत बाधा से पीडि़त सभी लोग शामिल होते हैं और बैंड बाजों की धुन पर नाचते हुए यह बारात जलसा के रूप गांव में भ्रमण करने के बाद धार्मिक स्थल पर पहुंचती है जहां मुखिया रिखी राम कहार द्वारा पास में ही लगे 20 फिट के खंभों पर चढ़कर झंडे के रूप में निशान चढ़ाया जाता है। जिसके बाद वर्ष भर बांधे गए बंधनों को खोलकर उनकी एक होली जलाई जाती है। इसके पीछे मान्यता है कि इस आग में सभी प्रेत बढ़ाएं जलकर खाक हो गई और अब है किसी को परेशान नहीं करेंगे।
निसंतान दंपति की भरी गोद
गांव के लोगों का कहना है कि इस स्थान पर आने वाले सभी लोगों की मुरादे पूरी होती है। कई परिवार ऐसे हैं कि जिनके घर में बच्चे नहीं थे वह आए और उनकी दुआ कबूल होने के बाद गोदी भर गई । रंग पंचमी के दिन वह लोग भी इस जलसे में शामिल होते हैं।
