नयी दिल्ली, 10 मार्च (वार्ता) विपक्ष ने सोमवार को राज्य सभा में सरकार पर रेलवे में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर ध्यान देने के बजाया वंदेभारत जैसी चमकीली रेलगाड़ियों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।
रेल अधिनियम 1989 में संशोधन के लिए रेल (संशोधन) विधेयक 2024 पर चर्चा कर इसको पारित करने के रेल मंत्री अश्चिनी वैषण की ओर से पेश प्रस्ताव पर चर्चा में विपक्षी सदस्यों ने यह भी कहा कि सरकार ने रेलवे बोर्ड की स्वायत्ता समाप्त कर दी है और अलग रेलवे बजट की परंपरा को बंद कर रेलवे के कामकाज की पारदर्शिता को खत्म कर दिया गया है। कोविड-19 महामारी के दौरान बुजुर्गों और पत्रकारों के लिए खत्म की गयी सब्सिडी को बहाल नहीं किया गया है तथा रेलवे के किराए मनमाने तरीके से बढ़ा जाने लगे हैं।
इस विधेयक को लोक सभा की मंजूरी मिल चुकी है।
विधेयक पर रेल मंत्री श्री वैष्णव के प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस पार्टी के सदस्य विवेक तन्खा ने कहा कि यह विधेयक रेलवे में सुधार का एक बड़ा अवसर हो सकता था, जिसे सरकार ने खो दिया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को उद्धरित करते हुए कहा, “रेलवे केवल रेलवे का इंजन और पटरियां नहीं हमारे देश को जाेड़ने का माध्यम है।”
उन्होंने कहा , ‘रेलवे में आज हम सुविघाओं के मनदंड पर खरे नहीं उतर रहे हैं। एयरलाइनों की तरह रेलवे यत्रियों के अधिकार को नोटीफाई किया जाना चाहि जो अब तक शायद इस लिए नहीं हुआ है। रेलवे में गरीब भारत सफर करता है।”
श्री तन्खा ने शिकायत की कि कोविड के नाम पर पत्रकारों और बुजुर्गों की सुविधा अब तक बहाल नहीं की गयी है । उन्होंने महिलाओं के लिए हर ट्रेन में एक डिब्बा लगाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि , ‘ रेलवे में कास्मेटिक नहीं, अचछे सुधार की जरूरत है। भारत में तेज गति और अच्छी सुविधा वाली ट्रेने हों पर उनके किरास तर्कसंगत हों। ”
कांग्रेस सदस्य ने कहा कि रेलवे कोई व्यवसायिक संगठन नहीं संस्था है, एक आंदोलन है, गरीबों का वाहन , देश का जान देश की अर्थव्यवस्था की धमनी है।” उन्होंने कहा,, “आप ने केवल सतही बदलाव किया है, आप जनता के बारे में सोचिए । महिलाओं, बुजुर्गों और गरीबों के बारे में सोचिए।”
उन्होंने रेलवे बजट पेश किए जाने की परंपारा को समाप्त कर उसे आम बजट में मिलाने की आलोचना करते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता खत्म हो गयी है। उन्होंने रेलवे में यत्री सुरक्षा की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि रेलवे में गाड़ियों की टक्कर रोकने के लिए रक्षा-कवच नाम के उपरकरण की घोषणा 2001 के बजट में की गयी थी। लेकिन इसका सभी मार्गों पर इसका अनुपालन नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे में किराए बढ़ा दिए जाते हैं पर रेवले की व्यवस्था में सुधार नहीं दिखता ।
श्री तनखा ने कहा कि इस सरकार ने रेलवे के बजट और रेलवे बोर्ड के महत्व को खत्म कर दिया है। रेलवे पर संसद की निगरानी खत्म हो गयी है। रेलवे बोर्ड का सरकारीकरण कर दिया गया है और इसको आज रेल मंत्री नौकरशाही के रवैए से चला रहे हैं। उन्होंने कहा , “ आप विकसित भारत की सोच रखते हैं तो संस्थानों की स्वायत्तता जरूरी है।
कांग्रेस सदस्य ने रेलवे बोर्ड को स्वायत्तता प्रदान करने की मांग की।
श्री तन्खा ने कहा कि रेवले में “सुरक्षा एवं सुविधा” सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय होना चाहिए लेकिन लगाता है कि सरकार का इस ओर ध्यान नहीं है। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में हुए विभिन्न रेल हादसों का जिक्र किया जिनमें फरवरी में महाकुंभ के समय नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में 18 मौत की घटना का उल्लेख भी था।
उन्होंने कहा, “ आज प्रौद्योगिकी के युग में ऐसी घटनाओं का दिखना यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम किस युग में हैं। दिल्ली की मौतों की जिम्मेदारी क्या कुछ अधिकारियों पर छोड़ा जा सकता है।” उन्होंने रेल मंत्री को रेल हादसों पर विगत में रेल मंत्रियों के इस्तीफे की पेशकश की याद भी दिलायी।
श्री तन्खा ने आंकड़ों को हवाला देते हुए कहा कि चीन ने भारत को रेलवे को बहुत पीछे छोड़ दिया है।
उन्होंने रेलवे में किराए बढाए जाने की रफ्तार और तरीकों पर आपत्ति की कि यह निजी क्षेत्र की संस्था नहीं एक लोक सेवा संगठन है। उन्होंने कहा कि वंदे भारत की स्पीड सामान्य ट्रेनों से कोई अधिक नहीं है जबकि किराया ज्यादा है।
नयी दिल्ली से रीवा (मध्य प्रदेश) के लिए ट्रेन शुरू हुई है लेकिन प्रयाग राज से रीवा पहुंचने में पांच घंटे लग जाते हैं जिससे लोगा प्रयागराज में ट्रेन छोड़ कर सड़क मार्ग से यात्रा करना अच्छा समझते हैं।
उन्होंने विभिन्न नीति आयोग और कुछ समितियों की सिफारिशों का उल्लेख करते हुए कहा कि रेलवे के परिचालन में सुधार के लिए रेलवे बोर्ड और रेलवे जोनों की स्वायत्तता महत्वपूर्ण है।
तृणमूल कांग्रेस की सुश्री सुष्मिता देब ने कहा कि 2014 से 2023 के बीच 678 रेल दुर्धटनाएं हुईं जिनमें 781 लोगों की मौत हुई तथा 1500 लोग घायल हुए जिनमें कर्मचारी भी शामिल थे।
सुश्री देब ने कहा कि अब तक केवल दो प्रतिशत मार्ग पर ही टक्कर रोधी कवच प्रणाली लगाई जा सकी है लेकिन सरकार की प्राथमिकता चमकदार वंदेभारत गाड़ियां चलाने की है। उन्होंने कहा कि रेलवे में सुरक्षा से जुड़े 1.57 लाख रिक्तियों को नहीं भरा गया है और केवल 50 प्रतिशत ट्रैंक का ही सुरक्षा की दृष्टि से नियमित निरीक्षण हो पा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘आज रेलवे में हादसे, विलंब, लूट की खबरें आम हो गयी हैं। यह विधेयक संदेश देता है कि यह सरकारी लापरवाही और अकुशलता पर ध्यान नहीं देती और इसे आम लेगों को परवाह नहीं है ।’
सुश्री देव ने कहा कि माल गाड़ियों के क्षेत्र में निजीकरण की योजना को विफल बताते हुए कहा कि असली जरूरत रेलवे जोनों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की है। उन्होंने असम में रेलवे की सुविधाओं का विस्तार तथा बांग्लादेश के रास्ते पूर्वोत्तर में रेल सम्पर्क बढ़ाने की की जरूरत पर भी बल दिया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा के )सुभाष बराला ने विधेयक के लिए रेल मंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस अधिनियम से रेलवे बोर्ड को वैधानिक आधार मिलेगा, रेलवे की व्यवस्था में सुधार होगा तथा रेलवे को विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप विकसित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का मुख्य उद्येश्य 1905 के अधिनियम को खत्म कराना तथा रेलवे के काम-काजा को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना है।
श्री बराला ने कहा कि इस विधेयक में रेलवे जोनों और मंडलों (डीआरएम) को स्वायत्तता और वित्तीय शक्तियां प्रदान करने तथा रेलवे में निजी निवेश आकर्षित करने, तथा रेलवे लेखांकन की व्यवस्था में बदलाव करने के प्रावधान है तकि भारतीय रेल को विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि 1905 में बना रेलवे बोर्ड मात्र एक सरकारी आदेश के आधार पर 120 तक चला आ रहा था। आश्चर्य है कि पिछली सरकारों ने इसमें कोई बदलाव नहीं किया और आज विपक्ष के लोग अपने समय के कामों की तारीफ कर है।
उन्होंने सदन में अपने पहले भाषण में कहा कि पिछले 20 वर्ष के दौरान 1989 के बजट में संशोधन के लिए विभिन्न समितियों ने ठोस सिफारिशें की थी पर मोदी सरकार से पहले उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतत्व में रेल मंत्री द्वारा उठाए गए कदमों की प्रसंशा की। उन्होंने कहा, ‘ विकसित भारत के लिए हमारे नियम , विनियमन और अधिनियम को समय के अनुरूप होना चाहिए।”
भाजपा सदस्य ने कहा कि आज रेल मंत्रालय एक विशाल संगठन 12.30 लाख कर्मचारी कार्यरत है। भारतीय रेल हर रोज 2.5 करोड़ यात्री ढोती है। इसकी 26 प्रतिशत कमाई यात्री सेवाओं से 67 प्रतिशत माल भाड़े से हो रही है। उन्होंने विभिन्न रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि , “ भरतीय रेल का सबसे प्रबल पक्ष यह है कि भारत में रेल सुविधा की मांग और विस्तार की संभावनाएं मजबूत । 2050 तक विश्व की रेलवे क्षेत्र की गतिविधियों में भारत की हिस्सेदारी 40 -50 प्रतिशत के बीच होगी।
उन्होंनें प्रयागराज महाकुंभ के समय रेलवे के प्रबंध की सराहना की। उन्होंने कहा कि रेलवे ने 13000 विशेष गाड़ियां चलाई और महाकुंभ में पहुंचे 66 करोड़ श्रद्धालुओं में से बड़ी तादाद रेलवे से पहुंचे।
श्री बराला ने रेल मंत्री के कार्यों की सराहना करते हुए कहा इस माह के अंत में सोनीपत से दिल्ली के बीच देश में पहली हाइड्रोजन चालित रेल शुरू होने जा रही है।
राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा ने विधेयक पर हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए सवाल किया कि क्या रेलवे में सौ प्रतिशत विद्युतीकरण की वास्तव में जरूरत है। उन्होंने ट्रेनों की वास्तवित स्थिति का पता लगाने के लिए ट्रेनों का औचक निरीक्षण किये जाने की मांग की। उन्होंने कोचों में मैनुअल कपलिंग को लेकर भी सवाल उठाये। सदस्य ने रेलवे में खाली पड़े पदों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने विशेष रूप से सामान्य ट्रेनों में सुविधाएं बढाने की मांग की।
बीजू जनता दल के शुभाशीष खुंटिया ने रेलवे की सेवा उपलब्ध कराने में ओड़िशा के साथ भेदभाव बरतने का आरोप लगाया। उन्होंने बालासोर रेल दुर्घटना का हवाला देते हुए कहा कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने रेल दुर्घटनाओं के पीड़ितों को अनुग्रह राशि देने के लिए अलग से फंड बनाये जाने की मांग की। सदस्य ने राज्य के धार्मिक स्थ्लों को एक सर्किट बनाकर रेल नेटवर्क से जोड़ने की मांग की।
आईयूएमएल के हारिस बीरन ने कोरोना काल के दौरान बंद की गयी रियायतों तथा अन्य छूटों को फिर से लागू किये जाने की मांग की। सदस्य ने रेलवे बोर्डों के सदस्यों की नियुक्ति में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
भारतीय जनता पार्टी की गीता उर्फ चन्द्रप्रभा ने कहा कि विधेयक में किये गये प्रावधानों से रेलवे का कामकाज बेहतर, स्वायत्त और पारदर्शी बनेगा। इससे रेलवे में शक्तियों का विकेन्द्रीकरण होगा और कामकाज में आसानी होगी।
झामुमो के डा सरफराज अहमद ने रेलवे में ठेके पर सेवाएं दिये जाने का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि क्या इसका कोई फायदा भी हुआ है। उन्होंने ट्रेनों में गरीब लोगों के साथ अलग से कोच लगाये जाने की मांग की। उन्होंने राज्य में रेलवे लाइनों पर बनें अंडरपास में पानी भरने का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने हावड़ा से गया के बीच वंदे भारत के मार्ग में परिवर्तन की भी मांग की।
तृणमूल कांग्रेस के प्रकाश चिक बाराईक ने सभी ट्रेनों में टक्कर रोधी प्रणाली कवच लगाये जाने की मांग की। उन्होंने यात्री किराये की बढती कीमतों का मुद्दा उठाया और कहा कि गरीब आदमी के लिए टिकट खरीदना आसान नहीं है। उन्होंने छात्रों और अन्य वर्गों के लिए पहले से जारी छूट बहाल करने की मांग की। उन्होंने विधेयक में कमी बताते हुए इसे समीक्षा के लिए प्रवर समिति में भेजने की मांग की।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के संदोष कुमार पी ने कहा कि इस सरकार के अब तक के कार्यकाल के दौरान 600 से अधिक दुर्घटनाएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं की संख्या बढ रही हैं। सदस्य ने रेलवे में खाली पदों को भरे जाने तथा बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति में पारदर्शिता का मुद्दा उठाया। उन्होंने भी विधेयक को प्रवर समिति में भेजे जाने की मांग की।
भाजपा के डा सिकंदर कुमार ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि विधेयक के प्रावधानों में रेल क्षेत्र को अधिक स्वायत्ता दी गयी है। उन्होंने कहा कि विधेयक में किये गये संशोधनों से यात्रियों को विशेष रूप से लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इससे रेलवे क्षेत्र को वर्ष 2030 तक पूरी तरह विकसित करने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। उन्होंने हिमाचल प्रदेश से वंदे भारत ट्रेन चलाये जाने के लिए भी रेल मंत्री को धन्यवाद दिया।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि इस विधेयक से रेलवे को नयी दिशा मिलेगी। इसमें भविष्य की रेलवे का रोड़मैप दिखाई देता है।
भाजपा की धर्मशीला गुप्ता ने कहा कि यह विधेयक भारतीय रेलवे के पुराने कानूनों के स्थान पर लाया गया है। इससे रेलवे के परिचालन में सुधार होगा। अमृत भारत स्टेशन के तहत 1321 स्टेशनों का विस्तार और विकास किया जा रहा है। रेलवे का शत प्रतिशत विद्युतीकरण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 11 वर्ष पहले रेलवे की सुरक्षा बेहतर नहीं थी। अब कवच के माध्यम से बेहतर सुरक्षा की व्यवस्था की गयी है। सेमी हाई स्पीड और बुलेट ट्रेन को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह विधेयक रेलवे बोर्ड को त्वरित निर्णय लेने में समक्ष बनायेगा। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा में बहुत सुधार हुआ है। यात्रियों को साफ सुथरी और आरामदायक वातावरण देने की कोशिश की गयी है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की डॉ फौजिया खान ने कहा कि रेलवे के प्रबंधन का विकेन्द्रीकरण करने की बात कही गयी थी लेेकिन इसमें इसका कोई जिक्र नहीं है। रेलवे के विकास में भी भेदभाव किया जा रहा है। रेलवे में भारी अव्यवस्था है जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। रेलवे का पूरी तरह से कायापलट करने की जरूरत है।
भाजपा के घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि यह विधेयक रेलवे से जुड़ा है जबकि कांग्रेस ने इस पर चर्चा की शुरूआत करते हुये रेल बजट जैसे मुद्दा उठाने की कोशिश की जबकि उनको रेलवे के बेहतरी पर चर्चा करनी चाहिए थी। उन्होंने रेलवे विशेषकर मोदी सरकार के कार्यकाल में आये बदलाव का उल्लेख करते हुये कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अगले 50 वर्ष को ध्यान में रखकर काम करते हैं। वर्ष 1905 के रेलवे के कानून को बदलाव जा रहा है। यह कानून भी विकसित भारत को गति देने का काम करेगा। यह विधेयक रेलवे बोर्ड को अधिक स्वायत्ता देने वाला है। प्रति दिन 15 किलोमीटर बिछायी जा रही है।
अन्नाद्रमुक के एम थंबी दुरै ने कहा कि तमिलनाडु की द्रमुक सरकार रेलवे की परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने में असफल रही है। रेलवे स्टेशनों पर भारतीय रेल बेहतर सुविधायें उपलब्ध कराना चाह रही है लेेकिन राज्य सरकार की उदासीनता के कारण ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है।
भाजपा के बृजलाल ने कहा कि इस विधेयक के कानून बनने पर 1905 में रेलवे बोर्ड वाला कानून समाप्त हो जायेगा और फिर नये कानून के तहत रेलवे बोर्ड का पुनर्गठन किया जा सकेगा।
भाजपा के प्रदीप कुमार वर्मा ने इस विधेयक को मोदी की गांरटी को पूरा करने वाला बताते हुये कहा कि रेलवे के लिए यह एक क्रांतिकारी विधेयक है। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद किये गये उपायों के कारण रेलवे दुर्घटना के मामलोें में भारी कमी आयी है और अभी हर महीने 24 दुर्घटनायें हो रही है। रेलवे शीघ्र ही शत प्रतिशत विद्युतीकरण के लक्ष्य को हासिल करने वाला है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वी शिवदासन ने कहा कि भारतीय रेल में दो लाख से अधिक पद रिक्त हैं और लोको पायलट को आराम नहीं मिल रहा है क्योंकि उनकी ड्यूटी अवधि बहुत अधिक है।
