
नई दिल्ली, 07 मार्च (वार्ता) शोध एवं रेटिंग एजेंसी इक्रा ने शुक्रवार को कहा कि घरेलू खपत और निवेश गतिविधियों में मजबूती के चलते वित्त वर्ष 2026 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने की संभावना है।
इक्रा के अनुसार, ग्रामीण मांग में तेजी आने की उम्मीद है, जिसे रबी की फसल से होने वाली कृषि नकदी प्रवाह और सामान्य से अधिक जलाशय स्तर का समर्थन मिलेगा। इससे मानसून में देरी या वर्षा की कमी के प्रभाव को संतुलित किया जा सकेगा।
रेटिंग एजेंसी ने कहा, “हालांकि वर्ष 2025 की पहली छमाही के बाद भी कृषि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए सामान्य और समान रूप से वितरित मानसून महत्वपूर्ण रहेगा।”
चालू वित्त वर्ष में धीमी रही शहरी खपत के वित्त वर्ष 2026 में बेहतर होने की संभावना है। इसमें केंद्रीय बजट में घोषित आयकर राहत, ब्याज दरों में संभावित कटौती और खाद्य मुद्रास्फीति में नरमी की उम्मीद जैसे कारक योगदान देंगे। इसके अलावा केंद्र सरकार के पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी, राज्य सरकारों द्वारा पूंजीगत ऋण जारी रखना और आवास क्षेत्र की मजबूत मांग से निवेश गतिविधियों को बल मिलेगा। यह निर्माण क्षेत्र और समग्र जीडीपी वृद्धि के लिए भी सकारात्मक संकेत है। हालांकि निजी पूंजीगत व्यय वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण धीमा रह सकता है।
इक्रा के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में जीडीपी 6.5 प्रतिशत और जीवीए के (सकल मूल्य वर्धन) 6.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है। इसके बावजूद, विनिमय दर में उतार-चढ़ाव और कड़े व्यापार नीतियों से जुड़ी चुनौतियां कुछ कंपनियों की लाभप्रदता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं, जो आर्थिक दृष्टिकोण के लिए एक प्रमुख जोखिम बना रहेगा।
