
*पडोसी देशों में महिलाओं का राजनीति में दखल ज्यादा*
*पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्धयनशाला के सेमीनार में विश्वविधालय अनुदान आयोग के संयुक्त सचिव चौहान ने कहा*
इंदौर । विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संयुक्त सचिव डा जीएस चौहान ने कहा है कि भारत में राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम है। हमारे पड़ोसी देशों में हमारी तुलना में महिलाओं का राजनीति में दखल ज्यादा है।
वे आज यहां देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला में महिला दिवस के अवसर पर भारत के नवनिर्माण में महिलाओं के योगदान विषय पर संबोधित कर रहे थे। डॉ.चौहान ने अपनी बात की शुरुआत बाबा साहब आंबेडकर के नारी शक्ति के लिए दिए गए योगदान से की । उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में महिलाओं का योगदान सदियों से महत्वपूर्ण रहा है। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक महिलाओं ने शिक्षा, राजनीति, विज्ञान, चिकित्सा और सामाजिक सुधारों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इतिहास में गार्गी, मैत्रेयी, रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले और सरोजिनी नायडू जैसी महान महिलाओं का योगदान उल्लेखनीय रहा है।
उन्होने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में भी महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, बेगम हजरत, कैप्टन लक्ष्मी सहगल और अरुणा आसफ अली जैसी वीरांगनाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। आज भी महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। खेल, विज्ञान, न्यायपालिका, अंतरिक्ष विज्ञान और प्रशासन में भारतीय महिलाओं ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी अभी भी अपेक्षाकृत कम है। विश्व स्तर पर तुलना की जाए तो भारत में महिलाओं का संसद में प्रतिनिधित्व लगभग 15 प्रतिशत है। हमारे पडोसी देश नेपाल (33 प्रतिशत), अफगानिस्तान (27 प्रतिशत), पाकिस्तान ( 20 प्रतिशत) और बांग्लादेश (21 प्रतिशत) है। यह लोकतांत्रिक प्रणाली में एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
चौहान ने कहा कि महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों में सुधार के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, उज्ज्वला योजना, सुकन्या समृद्धि योजना और महिला सशक्तिकरण मिशन जैसे कार्यक्रम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।आधुनिक युग में महिलाओं को सशक्त बनाने की आवश्यकता है ताकि वे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें। महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए समाज को जागरूक होना जरूरी है।उन्होंने कहा कि महिलाएं दूर जाकर पानी लाती है, प्रकृति के साथ नारी करीबी से जुड़ी है।उन्होंने लड़कियों को खासकर कार चलाना ,तैरना सीखना, खाना बनाना सीखना चाहिए।
विभागाध्यक्ष डा सोनाली नरगुंदे ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि पूरी दुनिया भ्रम और दुविधा में जीती है। नारीवाद गलत है । नारी कभी भी किसी वाद के साथ नही है। नारी को सृजन के लिए प्रकृति ने बनाया है। महिला दिवस की सार्थकता महिलाओ पर विचार के लिए है। भारतीय नारी सशक्त है । घर महिला ही संभालती है। बुराई के निर्मूलन के लिए यह दिवस मनाते है। लैंगिक समानता को हमें भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखना होगा। कार्यक्रम के अंत में आई एम एस की विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता जैन ने सभी का आभार माना। संचालन प्रथमेश व्यास ने किया।
