नेताओं ने ओढ़ रखी खामोशी की चादर

मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए कवायद चल रही है. मालवा- निमाड़ के नेता भी पद की लालसा पाले हैं. अंचल से कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय, भाजपा प्रवक्ता अर्चना चिटनीस , राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार का प्रदेशाध्यक्ष के लिए नाम चल रहा है. इनका वरिष्ठों से मेलजोल जारी है, पर इस सिलसिले में इनकी आकांक्षाओं ने इन दिनों खामोशी की चादर ओढ़ रखी है. अक्सर होता आया है कि समर्थक नियुक्ति-निर्वाचन की दशा में अपने आकाओं के प्रति माहौल बनाने लगते हैं, मगर इस बार ऐसा कुछ नहीं दिख रहा, केवल फुसफुसाहट है. इसका कारण हाल ही के कुछ वर्षों के भाजपा आलाकमान के निर्णय हैं, जो बताते हैं कि जिसका नाम चलता है ऐसे ही रह जाता है और बाजी किसी ओर के हाथ लग जाती है.

विगत दिनों अमित शाह के भोपाल प्रवास के दौरान विशेष बुलावे पर उनकी कैलाश विजयवर्गीय से अकेले में मुलाकात से चर्चा चल पड़ी कि उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है, वह प्रदेशाध्यक्ष पद भी हो सकता है या फिर राष्ट्रीय राजनीति में कोई महत्वपूर्ण पद. वहीं कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि महिला अध्यक्ष की स्थिति बनती है तब पूर्व वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री एवं बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस का नाम प्रभावी रूप से सामने दिखाई दे रहा है. बहरहाल सबको पत्ता खुलने का इंतजार है. यदि क्षेत्रीय संतुलन आड़े नहीं आते हैं और अंचल से किसी को पद मिलता है तो मालवा- निमाड़ ऐसा क्षेत्र होगा जिसमें कांग्रेस- भाजपा दोनों दलों के प्रमुख पद उसकी झोली में रहेंगे.

दुराचरण में फंसे प्रभारी बीएमओ

पेटलावद प्रभारी खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ सुरेश कटारा झाबुआ कलेक्ट्रेट कार्यालय के सभाकक्ष में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में शेष आयुष्मान कार्ड बनाए जाने की संख्या में भिन्नता होने पर सवाल जवाब में कलेक्टर के समक्ष अभद्रता कर बैठे. संतोषजनक उत्तर न देते हुए बैठक में जोर जोर से चिल्लाने लगे. कटारा के इस अशोभनीय व अमर्यादित कृत्य से महिला बाल विकास अधिकारी कर्मचारी एवं आयुष विभाग के साथ अन्य अधिकारी -कर्मचारी भडक़ गए और बीएमओ कटारा के पुराने विवाद भी सामने लाकर उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया. अब कटारा के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की तलवार लटक रही है.

ठाकुर सुरेंद्र सिंह शेरा की साख दांव पर

बुरहानपुर में नवलसिंह सहकारी शक्कर कारखाना चुनाव में भाजपा- कांग्रेस खुलकर आमने-सामने आ गए हैं. जहां कांग्रेसी नेता व पूर्व विधायक ठाकुर सुरेंद्र सिंह शेरा की साख इस चुनाव में दांव पर लगी है वहीं भाजपा भी संचालक मंडल पर कब्जे के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही. नामांकन भरने की प्रक्रिया दौरान निर्विरोध निर्वाचन में 161 डेलिगेट्स में से 50 भाजपा समर्थक तथा शिवकुमारसिंह समर्थक 27 विजयी घोषित हो चुके थे. इसके बाद 9 समूहों के लिए हुए मतदान के बाद अब यह आंकड़ा शिवकुमार सिंह समर्थक किसान हितैषी पेनल 34 और भाजपा समर्थक पेनल 52 डेलिगेट्स पर पहुंच गया. चुनाव की अगली प्रक्रिया में अब संचालकों एवं अध्यक्ष/ उपाध्यक्ष के निर्वाचन में भाजपा का पलड़ा भारी हो जाने से शेरा के माथे पर चिंता की लकीरें दिख रही है. कारखाना स्थापित होने के समय से बोर्ड पर शेरा परिवार का कब्जा रहा है. देखना होगा कि पहली बार इस पर भाजपा समर्थकों का कब्जा होगा या किसी रणनीति के तहत शेरा परिवार की शिवकुमार सिंह समर्थक पेनल पुन: अपना कब्जा बनाए रखने में सफल होगी.

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