यहाँ गोले बारूद के साथ देखिए प्राचीन हथियार

उज्जैन: सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व ,कृतित्व के साथ ही उनके साम्राज्य का चित्रण 26 फरवरी से विक्रम उत्सव के तौर पर प्रारंभ हुआ है, समारोह को लेकर देश प्रदेश से भी खासा प्रतिसाद मिल रहा है. कालिदास अकादमी से लेकर विक्रमादित्य शोधपीठ तक रंगारंग कार्यक्रम हो रहे हैं, वहीं टावर चौक से रामघाट तक भी प्रस्तुतियों के लिए कलाकार अपनी तैयारी में जुटे हुए हैं.

छोटे-छोटे बच्चों से लेकर सभी उम्र के कलाकार यहां प्रस्तुतियां दे रहे हैं, जिन्हें देखने के लिए शहरभर के कला प्रेमी आयोजन में शिरकत कर रहे हैं. विक्रम व्यापार मेले में कार बाजार भी अपने पूरे शबाब पर है और 2000 से अधिक गाड़ियां बुक हो चुकी है.
गोला बारूद, प्राचीन दुर्लभ अस्त्र शस्त्रों की प्रदर्शनी
अश्विनी शोध संस्थान महिदपुर द्वारा प्राचीन व दुर्लभ अस्त्र शस्त्रों की प्रदर्शनी भी विक्रम उत्सव के दौरान लगाई गई है. इसमे प्राचीन हथियार जो लगभग साढ़े चार हजार वर्ष पुराने हैं, साथ ही बारूद खंजर, तोप के गोले, तलवार व ढाल, तांबे से बनी कुल्हाडिय़ां, तीर के फलक, छुरे, पीतल लोहे व कांच से बनी तलवार की मुठें और अष्टधातु से निर्मित कवच इस प्रदर्शनी में आकर्षण के खास केंद्र है.
विभिन्न आयोजनों पर एक नजर
विक्रम उत्सव के दौरान वैदिक अंताक्षरी, संगीत, नृत्य, नाटक, चित्र, मूर्तिकला, पौराणिक फिल्मों का अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव, राष्ट्रीय विज्ञान समागम, अंतर्राष्ट्रीय इतिहास समागम, भारतीय बोलियों व हिन्दी भाषाई अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, पुस्तकों के प्रकाशन, विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के एप समेत कई प्रकल्प यहां देखने को मिल रहे हैं.
माँडना कला को लुप्त नहीं होने देंगे
नवभारत से चर्चा में त्रिवेणी संग्रहालयमें पदस्थ आदित्य चौरसिया ने बताया कि महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ परिसर में 27 फरवरी से 8 मार्च तक मांडना कार्यशाला का आयोजन किया गया है. इस कार्यशाला में स्थानीय स्कू?ल व महाविद्यालयों के छात्र-छात्राएँ तथा स्थानीय कलाकार व कलाप्रेमी अपनी भागीदारी दर्ज करेंगे. इस कार्यशाला को उज्जैन की वरिष्ठ लोक कलाकार कृष्णा वर्मा संयोजित कर रही है. हम इस कला को लुप्त नहीं होने देंगे, यहां आने वाले बच्चों को पेन पेंसिल कलर, शीट से लेकर दीवार पर निशुल्क स्थान उपलब्ध कराया जा रहा है.
आर्ष भारत प्रदर्शनी का अवलोकन
विक्रमादित्य शोध पीठ परिसर में ही एक बड़ा डोम स्थापित किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की तस्वीरें यहां पर चस्पा की गई है. भारतीय ऋषि वैज्ञानिक परंपरा पर केन्दि्रत देशभर के चित्रकारों ने इसे तैयार किया है. यह प्रदर्शनी भारतीय ऋषियों द्वारा दिये गये वैज्ञानिक योगदान को बताती है और यह स्पष्ट करती है कि भारतीय वैज्ञानिक परंपरा कितनी समृद्ध थी. 30 मार्च तक चलने वाली यह प्रदर्शनी उज्जैन के लोगों के लिए रोजना सुबह 11 से शाम 8 बजे तक अवलोकनार्थ खुली रहती है.
30 जून तक चलेगा आयोजन
विक्रमोत्सव का पहला चरण वर्ष प्रतिपदा के दिन संपन्न होगा. इसी दिन जल गंगा संवर्धन अभियान की भी शुरुआत होगी. यह अभियान 30 जून 2025 तक चलेगा और मध्यप्रदेश की नदियों, तालाबों और जल संरचनाओं के संरक्षण पर केंद्रित होगा.
श्रीराम तिवारी के नेतृत्व में आयोजन
महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी इस पूरे प्रकल्प को संचालित कर रहे हैं. श्री तिवारी ने नवभारत से चर्चा में बताया कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की कल्पना के अनुसार पूरे 125 दिन के विक्रम उत्सव को बेहतर तरीके से संचालित किया जा रहा है. विक्रमोत्सव की शुरुआत जब से हुई है, तबसे अच्छा खासा प्रतिसाद मिल रहा है. कलश यात्रा में विंटेज कार, स्पोर्ट्स बाइक और जनजातीय कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी

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