सेना ने रासायनिक युद्ध एजेन्टों का पता लगाने वाली प्रणाली की खरीद के लिए अनुबंध किया

नयी दिल्ली 26 फरवरी (वार्ता) सेना ने रासायनिक युद्ध एजेन्टों का पता लगाने में सक्षम स्वचालित रासायनिक एजेंट डिटेक्शन और अलार्म प्रणाली की खरीद के लिए 80 करोड़ 43 लाख रूपये की लागत से मेसर्स एल एंड टी लिमिटेड के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।

रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि मंगलवार को इस अनुबंध पर हस्ताक्षर किये गये और इसके तहत 223 अलार्म प्रणाली खरीदी जायेंगी। यह अनुबंध भारतीय खरीद (आईडीडीएम) श्रेणी के अंतर्गत है और इससे सरकार के आत्मनिर्भरता अभियान को अच्छा खासा बढ़ावा मिलेगा। इस प्रणाली के उपकरणों के 80 प्रतिशत से अधिक घटक और उप-प्रणालियाँ स्थानीय स्तर पर खरीदी जाएँगी।

इस प्रणाली को रक्षा अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान, ग्वालियर द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। यह रासायनिक, जैविक, रेडियोधर्मी और परमाणु क्षेत्र में देश की स्वदेशीकरण पहल में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

इस प्रणाली का इस्तेमाल पर्यावरण से हवा का नमूना लेकर रासायनिक युद्ध एजेंटों (सीडब्ल्यूए) और प्रोग्राम किए गए विषाक्त औद्योगिक रसायनों (टीआईसी) का पता लगाने के लिए किया जाता है। यह आयन मोबिलिटी स्पेक्ट्रोमेट्री (आईएमएस) के सिद्धांत पर काम करता है और इसमें हानिकारक एवं विषाक्त पदार्थों का निरंतर पता लगाने और एक साथ निगरानी के लिए दो अत्यधिक संवेदनशील आईएमएस सेल होते हैं।

सेना की क्षेत्रीय इकाइयों में इस प्रणाली को शामिल करने से सेना की परिचालन के साथ-साथ शांति काल, विशेषकर औद्योगिक दुर्घटनाओं से संबंधित आपदा राहत स्थितियों से निपटने के लिए रक्षात्मक क्षमता में अच्छी खासी वृद्धि होगी।

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