
मुख्य सचिव को मिली व्यक्तिगत उपस्थिति से राहत
जबलपुर। न्यायिक कर्मचारियों को उच्च वेतनमान का लाभ दिये जाने का मामला ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के कारण राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के समक्ष नहीं रखा गया है। सरकार की तरफ से उक्त जानकारी पेश करते हुए मुख्य सचिव को व्यक्तिगत उपस्थित की छूट प्रदान करने का आग्रह किया गया। हाईकोर्ट जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ ने मुख्य सचिव को व्यक्तिगत उपस्थिति की छूट प्रदान करते हुए अपने आदेश में कहा है कि उम्मीद की जा सकती है कि मुख्य सचिव सक्रिय कदम उठाते हुए मामले को राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष विचार के लिए रखेंगे। युगलपीठ ने मुख्य सचिव को अगली सुनवाई के दौरान वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के आदेश जारी किये।
हाईकोर्ट के कर्मचारी किशन पिल्लई व अन्य की तरफ से दायर की गयी अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ को सरकार की तरफ से बताया गया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के कारण मामले को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में नहीं प्रस्तुत किया जा सकता है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तथा इससे संबंधित कार्यक्रमों के समापन के तुरंत बाद राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मामले को प्रस्तुत किया जायेगा।
युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी करते हुए अगली सुनवाई 24 मार्च को निर्धारित की है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से दायर अवमानना याचिका में कहा गया था कि सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक कर्मचारियों को उच्च वेतनमान देने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किये थे। देश के अन्य प्रदेश सरकार ने निर्देशों का पालन करते हुए न्यायिक कर्मचारियों को उच्च वेतनमान प्रदान कर दिया था। प्रदेश सरकार द्वारा न्यायिक कर्मचारियों को उच्च वेतनमान का लाभ प्रदान नहीं किया गया। जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए अप्रैल 2017 को न्यायिक कर्मचारियों को उच्च वेतनमान का लाभ देने निर्देश जारी किये थे। हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किये जाने के कारण उक्त अवमानना याचिका दायर की गयी है।
