भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे अधिकारियों पर सरकार मेहरवान!

आरईएस ईई, उपपंजीयक, जिला पंचायत बीआरसीसी एवं बीईओ बैढ़न तथा संविदा सहायक यंत्री जिला शिक्षा केन्द्र पर है गंभीर आरोप

नवभारत न्यूज

सिंगरौली 22 फरवरी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश से भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने का आह्वान कर ते आ रहे है। लेकिन प्रदेश के सिंगरौली जिले में प्रदेश सरकार के ही नुमाइन्दे भ्रष्टाचार एवं आर्थिक अनियमितता करने मेें कोई कोरकसर नही छोड़ रहे है। कई विभागों के अधिकारी-कर्मचारी विभिन्न आरोपो में घिरे हुए हंै। लेकिन प्रदेश सरकार इन कथित अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई नही कर रही है। जिसको लेकर प्रमुख दल कॉग्रेस के नेता आड़े हाथ ले रहे हैं।

दरअसल जिले में धीरे-धीरे अपनी जड़ जमाता जा रहा है। भ्रष्टाचार की जड़े काफी गहरी हो चुकी हैं। इसका खात्मा करना अब कठिन लग रहा हैं। सिंगरौली में भ्रष्टाचार को लेकर पिछले माह प्रदेश के शीर्ष अदालत के एक विद्वान जस्टिस के द्वारा एक राजस्व के विस्थापन संबंधित प्रकरण की सुनवाई करते हुए तीखी टिप्पणी किया गया था। जिसको लेकर प्रदेश भर मेें सिंगरौली की जमकर किरकिरी हुई। उच्च न्यायालय के द्वारा भ्रष्टाचार को लेकर किये गये सक्त टिप्पणी किये जाने के बावजूद जिले में प्रदेश सरकार की किरकिरी कराने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई न करने से आम जनता भी सवाल उठाने लगी है। यहां बताते चले कि उपपंजीयक सिंगरौली अशोक सिंह परिहार एक नही दर्जनों की संख्या में गंभीर आरोप है। सबसे बड़ा आरोप चितरंगी तहसील क्षेत्र के प्रतिबंधित अभ्यारण्य बगदरा के झपरहवा गांव की 30 एकड़ भूमि का फर्जी विक्रे ता ने संजय कुमार जायसवाल को विक्रय रजिस्ट्री कर दिया था। आरोपियों के विरूद्ध एफआईआर कोतवाली बैढ़न दर्ज होने के बावजूद पुलिस अधिकारियों की भूमिका सवालों के कटघर्रे में हैं। वही अन्य कई विभागो के अधिकारी व कर्मचारी भ्रष्टाचार के नैया में गोता लगा रहे हैं। लेकिन इन पर कार्रवाई नही की जा रही है। लेकिन इन कथित अधिकारियों की कार्य प्रणाली जग जाहिर हो चुकी हैं। वही उधर प्रदेश सत्ताधारी नेताओं की चुप्पी से भ्रष्टाचार करने वाले को बल मिल रहा हैं। ऐसे प्रतिक्रियाये आमजन भी करने लगे हैं। फिलहाल प्रबुद्धजन मान रहे हैं कि जिले में बेईमानी की जड़े काफी गहरी होती जा रही हैं। इसकी खात्मा के लिए प्रदेश सरकार को कड़े कदम उठाने पडें़गे। वरना सरकारी नुमाइन्दे प्रदेश सरकार की छवि पर कोई कोर कसर नही छोड़ेंगे।

भ्रष्टाचारी बीईओ का नही हुआ निलम्बन

भ्रष्टाचार के आरोप में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीस बैढ़न के द्वारा पिछले वर्ष 2 दिसम्बर को अपना अहम फैसला सुुनाते हुए बैढ़न में पदस्थ बीईओ रामदास साकेत सात साल का सश्रम करावास की सजा एवं 55 हजार रूपये अर्थदण्ड से अधिरोपित किया गया था। करीब 55 दिनों तक जेल की हवा खाता रहा । उच्च न्यायालय से जमानत मिलने पर बीईओ बाहर आया। लेकिन आरोप है कि जेल में 55 दिनों तक रहने के बावजूद आयुक्त लोकशिक्षण संचालनालय भोपाल के द्वारा न तो निलम्बन की कार्रवाई की गई और न ही आरोप पत्र जारी किये गये और जेल से छूटने के बाद आरडी साकेत बीईओ दफ्तर पहुंच अपनी हस्ताक्षर करने लगा है।

आरईएस के कार्यपालन यंत्री भी घिरे

ग्रामीण यांत्रिकी सेवा सिंगरौली मनोज बाथम कई मामले में घिरे हुए हैं। सहायक यंत्रियों के प्रभार को लेकर इन पर कई सवाल खड़े किये गये। साथ ही कार्यपालन यंत्री पर आरईएस पर चितरंगी ब्लॉक के माइनर रिपेयर एवं पोताई कराने के मामले में घिरे हुए हैं। साथ ही परिवीक्षा अवधि के दौरान सहायक यंत्रियों से टीएस कराये गये। पांच छात्रावासों का टेन्डर के प्रकरण में भी खुब किरकिरी हुई। इसकी शिकायत प्रदेश सत्ताधारी नेताओं जिसमें सांसद, विधायक, मंत्री, जिलाध्यक्ष तक के यहां होई । लेकिन किसी की जुबान तक नही खुली।

इनका कहना:-

भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर हैं। दफ्तरों में लूट खसोट मची है। कई अधिकारियों व कर्मचारियों पर अनियमित रूप से कार्य एवं भ्रष्टाचार करने के आरोप हैं। बीईओ बैढ़न जेल भी जा चुके हैं। करीब 60 दिनों तक जेल में रहे लेकिन उनके खिलाफ निलम्बन की कार्रवाई नही हुई। इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है?

ज्ञानेन्द्र द्विवेदी, जिलाध्यक्ष

जिला कॉग्रेस कमेटी सिंगरौली ग्रामीण

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