परंपरागत खेती के विकास की कार्ययोजना के लिए कार्यशाला संपन्न

प्राकृतिक खेती से अनाज और मिट्टी दोनों की गुणवत्ता बढ़ती है: डीन एजी कालेज

नवभारत न्यूज

रीवा, 21 फरवरी, कृषि महाविद्यालय सभागार में एक दिवसीय परंपरागत कृषि विकास की कार्ययोजना तैयार करने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कृषि महाविद्यालय के डीन डॉ. संत कुमार त्रिपाठी ने कहा कि प्राकृतिक खेती और परंपरागत अनाजों तथा अन्य उत्पादों से शरीर को अधिक पोषण मिलता है. बिना खाद के की गई खेती आर्थिक रूप से भी लाभदायक होती है. विकासखण्ड स्तर पर जैविक खेती के नोडल अधिकारी और सर्विस प्रोवाइडर तैनात हैं. इनके माध्यम से परंपरागत तथा जैविक खेती के लिए ऑनलाइन पंजीयन कराएं. अब तक सिरमौर और रायपुर कर्चुलियान विकासखण्डों में जैविक खेती के लिए 150 से अधिक किसानों का पंजीयन किया गया है. खेती से अधिक लाभ कमाने और अनाजों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पंरपरागत खेती को किसान अपनाएं.

कार्यशाला में संयुक्त संचालक कृषि केएस नेताम ने कहा कि इस कार्यशाला का आयोजन किसानों को प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किया गया है. किसान जैविक खेती को गांव के समूह में क्लस्टर बनाकर अपनाएं. इससे प्राकृतिक खेती में अधिक लाभ होगा. कृषि वैज्ञानिक डॉ संजय सिंह ने कृषि विभाग की आत्मा परियोजना से प्रस्तावित कार्ययोजना के संबंध में उपयोगी सुझाव दिए. उन्होंने आत्मा परियोजना के संचालक तथा कृषि कंपनी के सर्विस प्रोवाइडरों द्वारा बनाई गई कार्ययोजना की सराहना की. कार्यशाला में उप संचालक कृषि यूपी बागरी, सभी एसएडीओ, प्रधानमंत्री सडक़ सुरक्षा योजना के जिला स्तरीय समिति के सदस्यगण एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक उपस्थित रहे.

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