
जबलपुर। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने आत्महत्या दुष्प्रेरण के आरोपी पति को पुत्र व ससुर के बयान अभियोजन विरोधी पाकर जमानत का लाभ दे दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि आवेदक को जमानत अवधि के दौरान ट्रायल कोर्ट के समक्ष प्रत्येक पेशी में हाजिर होना होगा। इस शर्त के अलावा 50 हजार के पर्सनल बांड व इतनी ही राशि की साल्वेंट जमानत पर रिहाई का आदेश पारित किया जाता है। आवेदक गोटेगांव, नरसिंहपुर निवासी अमरनाथ मेहरा की ओर से अधिवक्ता ओमप्रकाश राठौर ने पक्ष रखा। जबकि शासकीय अधिवक्ता आत्माराम बेन ने जमानत अर्जी का विरोध किया। आवेदक की ओर से दलील दी गई कि गोटेगांव पुलिस द्वारा आत्महत्या दुष्प्रेरण का प्रकरण कायम किए जाने के बाद से 30 सितंबर, 2024 से वह हिरासत में है। उसकी पत्नी बबली मेहरा ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी। इसकी कोई वजह रही होगी। लेकिन पुलिस ने दूसरे पक्ष के दबाव में आवेदक पति के विरुद्ध शारीरिक मानसिक प्रताड़ना दिए जाने का अपराध कायम कर लिया। अभियोजन की कहानी झूठी है, इसकी तस्दीक मृतिका बबली मेहरा व आवेदक अमरनाथ मेहरा के पुत्र अनुराग मेहरा व ससुर मंगल सिंह के बयानों से भी हो चुकी है, जो अभियोजन का समर्थन नहीं करते। आवेदक के विरुद्ध आरोप पत्र प्रस्तुत किया जा चुका है। ट्रायल में लंबा वक्त लगेगा। लिहाजा, जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।
