
हमले से दशहत में गांव वाले
झाड़ियों को जेसीबी से साफ कराया
नवभारत कटनी। बांधवगढ टाइगर रिजर्व की सीमा कटनी जिले से सटी है। इसलिए रिजर्व क्षेत्र के बफरजोन में जंगली जानवरों की हलचल आए दिन देखने को मिलती है। इसकी सीमा सटे बड़वारा वन परिक्षेत्र में इसके कारण कई बार जानवरों की आवाजाही हो जाती है। जिससे गांव वालों में दहशत का माहौल पैदा हो जाता है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र से सटे जिले के वन परिक्षेत्र में पिछले चार दिन से बाघ की हलचल थी। जिसे मंगलवार की सुबह ग्रामीणों ने जगुआ गांव के हाईस्कूल के समीप देखा था। यह क्षेत्र बफरजोन का इलाका माना जाता है। जिस पर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अमले और बड़वारा वन परिक्षेत्र के अमले ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए बाघ को हाथियों के दल के सहारे खदेड़ा था। लेकिन सुबह के समय खदेड़ने के बाद शाम को बाघ ने दो लोगों पर हमला कर घायल कर दिया था। जिसमें एक घायल को अधिक जख्म होने के कारण उसे जिला अस्पताल भेजा गया था। वहीं दूसरा घायल को सामान्य खरौच होने के कारण उसकी हालत ठीक है।
मंगलवार को घटना के बाद से अब और अधिक सतर्कता बरतने का काम करते हुए बाघ की सर्चिंग फिर आसपास के सटे इलाकों में हाथियों के दल के माध्यम से की गई। दिनभर हाथियों का दल सीमा से सटे इलाके के आसपास सर्चिंग करता रहा, लेकिन यहां पर बाघ देखने को नहीं मिला। जानकार बताते हैं कि विभागीय हलचल के कारण वह बफरजोन के इलाके में दुबक गया है। हलचल कम होने पर वह फिर बड़वारा वनपरिक्षेत्र के गांवों में शिकार की तलाश में आ सकता है। इस कारण जगुआ, बरमानी, करेला, सलैया, बिरवाही, कुआं, करौंदी कला समेत अन्य गांव के लोगों में दशहत का माहौल बना हुआ है।
जिन झाडियों छिपा था बाघ उन्हें जेसीबी से कराया साफ
मंगलवार को बाघ के हमले के बाद से गांव के लोग घरों में दुबके रहे। गांव वालों की दहशत को कम करने के लिए बुधवार को वन अमले के जवानों को तैनात किया गया है। वहीं मंगलवार को जिन झाडियों में बाघ छिपा बैठा था उन झाडियों को बुधवार को जेसीबी से साफ कराया गया है। ताकि स्कूल के आसपास बाघ को छिपने की जगह न मिले। यहां आसपास के क्षेत्र की पूरी झाडियों को साफ कर दिया गया है। वहीं हाई स्कूल के आसपास जहां भी बड़ी झाडियों को कटवाकर अलग किया गया है। दिनभर अमला बफरजोन के आसपास तैनात रहा और हलचल पर नजर बनाए हुए था।
वन विभाग ने बढाई गस्ती
जानकारी के अनुसार जिस जगह मंगलवार को बाघ ने हमला था, वहां अधिक सर्तकता बरती जा रही है। हालांकि बफरजोन में इस तरह जानवरों की हलचल को सामान्य माना जाता है। लेकिन जब वह बड़वारा वन परिक्षेत्र में आते हैं तो यहां खतरा अधिक बढ जाता है। इसी कारण आदमखोर जानवरों ने इससे पहले भी मवेशियों समेत लोगों को भी कई मर्तबा अपना शिकार बनाया है। इसी के चलते बड़वारा वन परिक्षेत्र से सटे बफरजोन की सीमा पर जवानों को विशेष सतर्क रहने के लिए रेंजर गोविंद नारायण शुक्ला ने निर्देशित किया है। रेंजर के अनुसार जबसे बाघ की हलचल की सूचना मिली है तभी से वन अमले को सतर्क किया गया है। लगातार गांव वालों से संपर्क रखते हुए उन्हे खतरे वाले स्थानों पर जाने से रोका जा रहा है। ताकि किसी भी तरह की घटना से बचा जा सकें।
