मुंबई 07 फरवरी (वार्ता) भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा कि लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (एफआईटी) ढांचे की शुरूआज से औसत मुद्रास्फीति कम रही है और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई ज्यादातर लक्ष्य के अनुरू रही है।
श्री मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक में लिए गये निर्णयों की जानकारी देते हुयेक कहा कि समिति के निर्णय निश्चित रूप से विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के लिए दिलचस्पी का विषय है, क्योंकि यह देश के लगभग सभी नागरिकों के जीवन को प्रभावित करता है। यह व्यवसायों, अर्थशास्त्रियों, शिक्षाविदों और वित्त जगत के लिए प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि एफआईटी ढांचे की शुरूआत वर्ष 2016 में की गयी थी और 2021 में इसकी समीक्षा की गई थी।
उन्होंने कहा “ मेरा मानना है कि इसने इन वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था की अच्छी सेवा की है, जिसमें महामारी के बाद की चुनौतीपूर्ण अवधि भी शामिल है। एफआईटी की शुरूआत के बाद औसत मुद्रास्फीति कम रही है। इसके अलावा, सीपीआई मुद्रास्फीति ज्यादातर लक्ष्य के अनुरूप रही है। हालाँकि इसकी स्थापना के बाद से कुछ अवसरों पर ऊपरी सहनशीलता बैंड को महंगाई ने तोड़ा है। हम उभरती हुई विकास-मुद्रास्फीति गतिशीलता का जवाब देते हुए ढांचे में निहित लचीलेपन का उपयोग करके अर्थव्यवस्था के सर्वोत्तम हित में व्यापक आर्थिक परिणामों में सुधार करना जारी रखेंगे। इसके अलावा, हम नए डेटा के उपयोग में प्रगति करके, प्रमुख मैक्रोइकॉनोमिक वैरिएबल्स के पूर्वानुमान और नाउकास्टिंग में सुधार करके और अधिक मजबूत मॉडल विकसित करके इस ढांचे के निर्माण खंडों को और अधिक परिष्कृत करने का प्रयास करेंगे।”
उन्होंने कहा कि तरलता कवरेज अनुपात (एलसीआर), बैंकों द्वारा प्रावधान के लिए अपेक्षित ऋण हानि (ईसीएल) ढांचे और कार्यान्वयन के तहत परियोजनाओं को नियंत्रित करने वाले विवेकपूर्ण मानदंडों से संबंधित कुछ नियामक परिवर्तनों के प्रस्ताव किये गये हैं।
श्री मल्होत्रा ने कहा “ हम अर्थव्यवस्था के समग्र हित में विवेकपूर्ण और आचरण संबंधी नियामक ढांचे को मजबूत, युक्तिसंगत और परिष्कृत करना जारी रखेंगे। अर्थव्यवस्था के हित में वित्तीय स्थिरता और उपभोक्ता संरक्षण की आवश्यकता है। हमारा जनादेश इन दोनों को बढ़ाना है। साथ ही, आर्थिक हित भी दक्षता बढ़ाने की मांग करता है, जो हमारा कर्तव्य भी है। हम मानते हैं कि जिस तरह कोई मुफ्त भोजन नहीं होता है, उसी तरह स्थिरता और उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ाने के लिए विनियमन भी लागत से रहित नहीं है। स्थिरता और दक्षता के बीच कुछ समझौते हैं। हम नियम बनाते समय इस समझौते को ध्यान में रखेंगे। हमारा प्रयास प्रत्येक नियम के लाभ और लागत को ध्यान में रखते हुए सही संतुलन बनाने का होगा। मैं सभी हितधारकों को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हम नियम बनाने में परामर्श प्रक्रिया जारी रखेंगे। हितधारकों के सुझाव मूल्यवान हैं और हम कोई भी बड़ा निर्णय लेने से पहले उन पर गंभीरता से विचार करेंगे। हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि ऐसे नियमों का कार्यान्वयन सुचारू हो; हम परिवर्तन के लिए पर्याप्त समय देंगे और जहाँ नियमों का बड़ा प्रभाव पड़ता है, वहाँ कार्यान्वयन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।”