
मौसम विभाग ने फरवरी अंत व मार्च की शुरुआत में जताई बरसात की संभावना
शाजापुर, 6 फरवरी. क्षेत्र में रबी सीजन दलहन, तिलहन व अनाज की फसलें लहलहा रही हैं. मौसम अनुकूल होने से फसलें इन दिनों बेहतर स्थिति में नजर आ रही है और खेतों में लहलहा रही हैं. इधर, मौसम एक्सपर्ट फरवरी के अंत व मार्च की शुरुआत में बारिश की संभावना जता रहे हैं. जबकि यह समय गेहूं सहित अन्य फसलों के पकने का रहता है. ऐसे में बारिश होगी तो किसानों को नुकसान का अंदेशा है.
गौरतलब है कि जिले में लगभग 2.57 लाख हेक्टेयर में रबी की फसलें लगी हुई हैं. इसमें 1.65 लाख हेक्टेयर में सिर्फ गेहूं की फसल लगी है. प्राप्त जानकारी के अनुसार अक्टूबर शुरुआत से ही किसानों ने रबी फसलों की बुवाई शुरू कर दी थी. किसानों का कहना है अभी फसलें बेहतर स्थिति में है. रबी फसलों को लगे हुए करीब तीन महीने हो चुके हैं. कुछ ही क्षेत्र ऐसे हैं, जहां इस सीजन की मुख्य गेहूं की फसल तैयार हो गई. बाकी ज्यादातर खेतों में अभी गेहूं की फसल लहलहा रही है. फसलें तैयार होने में अभी करीब दो महीने और लगेंगे. मार्च-अप्रैल में फसल कटाई शुरू हो जाएगी. कृषि वैज्ञानिक डॉ. डीके तिवारी ने बताया कि इस बार शुरुआत से ही मौसम रबी फसलों के अनुकूल रहा है. सीजन में दो मावठे गिरे, जो फसल के लिए फायदेमंद रहे. मौसम पर्यवेक्षक सत्येंद्र धनोतिया ने बताया फरवरी शुरू हो गया है. इस महीने में ज्यादा ठंड नहीं रहेगी. मौसम खुला रहेगा. तेज धूप निकलेगी. 10 फरवरी के बाद एक-दो दिन बादल छा सकते हैं. मौसम में ज्यादा विशेष परिवर्तन नहीं होगा. फरवरी अंत और मार्च की शुरुआत में मौसम परिवर्तन होते ही बारिश व ओलावृष्टि होने की संभावना है. कृषि विज्ञान केंद्र शाजापुर के प्रधान कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीआर अंबावतिया ने बताया कि फरवरी अंत और मार्च में फसलें तैयार होने का समय रहता है. यदि ऐसे में ओले के साथ ज्यादा बारिश हुई तो फसलों को नुकसान होगा. हालांकि हल्की से मध्यम बारिश होगी तो फसलों को ज्यादा नुकसान नहीं होगा. दलहन-तिलहन फसलों को छोडक़र कई किसानों ऐसे हैं, जिन्होंने गेहूं की फसल की बुआई दिसंबर अंत तक यानी देरी से गेहूं फसल को बारिश से कम नुकसान रहेगा.
गेहूं को अभी बारिश की दरकार…
किसानों ने बताया कि अभी तक मौसम ठीक है. इससे फसलें भी बेहतर स्थिति में हैं. पौधों में बीज आ गए हैं. गेहूं फसल में पानी दे रहे हैं. तय मात्रानुसार खेतों में कीटनाशक का छिडक़ाव कर रहे हैं, ताकि फसलों में इल्ली व कीट व्याधि का प्रकोप न बढ़े. वहीं अन्य किसानों ने बताया कि मौसम अच्छा होने से इस बार पैदावार भी अच्छी होने की उम्मीद है. यदि फसल पकने के बाद बारिश हुई, तो इससे नुकसान होगा. गेहूं की चमक चली जाएगी, इससे रेट कम मिलेंगे. अभी फरवरी के पहले पखवाड़े में बारिश हो जाए, तो कोई दिक्कत नहीं होगी. क्योंकि गेहूं में अभी पानी की जरूरत है.
उपज मंडी में होने लगी नए गेहूं की आवक
एक तरफ जिले में अधिकांश जगह गेहूं की फसल लहलहा रही है, तो दूसरी ओर कुछ जगह के गेहूं की कटाई कर मंडी में बेचने के लिए पहुंच रहे हैं. बीते दिनों सीजन में पहली बार कृषि उपज मंडी शाजापुर में नए गेहूं की मुहूर्त खरीद हुई थी. इस पर कृषि वैज्ञानिक डॉ. अंबावतिया ने बताया जिन किसानों ने अक्टूबर के पहले पखवाड़े में गेहूं की बुवाई की और कम पानी का गेहूं बोया. उसी गेहूं को किसान मंडी में बेच रहे हैं. बाकी सिंचित गेहूं पांच से छह पानी देने के बाद तैयार होता है, जो फरवरी अंत व मार्च में आएगा.
