शहर की एमआर सड़कों पर 5 हजार से ज्यादा बाधक….?

मास्टर प्लान का समय खत्म, लेकिन सड़क एक भी पूरी नहीं बनी
सबसे ज्यादा दो नंबर विधानसभा में है बाधक

वीरेंद्र वर्मा

इंदौर: मास्टर प्लान 2021 में 1 से लेकर 12 एक भी सड़क पूरी नहीं बन पाई है. इसकी वजह यह है कि हर सड़क की चौड़ाई और लंबाई में बड़ी संख्या में बाधक है. सड़क का प्लान घोषित करते समय अधिकारियों ने यह दूरदर्शिता नहीं रखी. परिणाम यह है कि आज मेजर रोड पर 5 हजार से ज्यादा बाधक है. आश्चर्य की बात तो यह है कि उक्त सड़कों के घोषित होने के बावजूद बाधक और अतिक्रमण को रोका नहीं गया.इंदौर का मास्टर प्लान 1991 के बाद 2008 में 2021 के अनुसार बनाया गया था. इसमें एमआर (मेजर रोड) सड़कों एवं रिंग रोड, आरईडब्ल्यू जैसी सड़कों का प्रस्ताव और प्रावधान किया गया.

जितनी सड़के शहर में बन जाना थी, वह सब की सब अधूरी पड़ी है। इसका एकमात्र कारण है कि कहीं बस्ती, कहीं कोई कॉलोनी, कहीं पक्के मकान तो कही निजी जमीनें बाधक है. उक्त सड़कों में आज मेजर रोड एक भी पूरा नहीं बन पाया है. एमआर सड़के पहले आईडीए की थी, लेकिन अतिक्रमण दस्ता और निगम की सहायता नही मिलने से नहीं बन सकी. फिर नगर निगम सीमा का विस्तार हो गया और 29 गांव के कारण मेजर रोड नगर निगम के हिस्से में चली गई. एमआर 2 से लेकर एमआर 10 तक नगर निगम की सीमा में है. उक्त सड़कों के चौड़ाई 30 मीटर से लेकर 60 मीटर तक यानी 100 सौ फीट से 250 फीट तक चौड़ी और लंबाई जो है तय है.

इसमें कोई सड़क बायपास, तो कोई रिंग रोड को जोड़ती है. मगर ज्यादातर सड़कें बायपास से जुड़ रही है या रिंग रोड और बायपास के बीच है. कई सड़के एबी रोड से रिंग रोड को जोड़ती हुई बाय पास एक कनेक्टिंग है. उक्त सड़कों पर बड़े-बड़े बाधक है, ये बाधक झुग्गी बस्ती से लेकर अवैध कॉलोनी और कॉलोनी की बड़ी बस्तियां है जो वर्षो से बसी हुई है. कई बस्तियां और कॉलोनियां 40 साल से भी ज्यादा पुरानी है. ऐसे में मास्टर प्लान बनाने वालों ने यह ध्यान ही नहीं रखा है कि उक्त बस्तियां एवं बाधक कैसे हटेंगे? इनको सड़कों की जगह के बीच बसने से रोका भी नही गया. बस्तियों बसने से नहीं रोकने के कारण भी नेता और पार्षद, विधायक रहे है, जिनके मतदाता प्रभावित हो रहे थे. अब भी समस्या जस की तस है.

आईडीए एमआर 11 और 12 में उलझा , 1500 सौ से ज्यादा बाधक
मास्टर प्लान की सिर्फ दो सड़कें आईडीए के पास बची है, जिनका निर्माण चल रहा है. उक्त दोनों सड़कों में ही 15 सौ से ज्यादा झुग्गी बस्ती, रविदास नगर जैसी कॉलोनी और ईट भट्टे बाधक है. भट्टे तो हटाए जा रहे हैं.
वर्तमान में आईडीए उक्त सड़कों को टुकड़ो टुकड़ो में बना रहा है. मतलब जहां जगह खाली है सड़क बन रही है, बाकी बस्ती ले बाहर ले जाकर काम बंद हो जाता है.

सबसे ज्यादा एमआर सड़कें दो नंबर विधानसभा में
मास्टर प्लान की सबसे ज्यादा सड़के दो नंबर विधानसभा में है. एमआर 2, 9, 10, 11, 12 सड़कें तो है सीधे तौर पर दो नंबर में ही है. कई सड़कें एमआर-4 तीन से शुरू होकर एक नंबर होते हुए दो में मिल रही है. इसके अलावा एमआर 3 सड़क रिंग रोड रीजनल पार्क से राऊ विधानसभा में अधूरी पड़ी है. एक मात्र एमआर 5 सड़क विधानसभा 1 में है.

मास्टर प्लान में नहीं रखा ध्यान सड़कों की जगह का
उक्त मेजर रोड के निर्माण में 5 हजार से ज्यादा बाधक है. ये बाधक विभिन्न तरह के है, जिनमें झुग्गी बस्ती से लेकर अवैध कॉलोनी और कई पुराने नगर है. इनको हटाने की मशक्कत इतनी है कि सरकार को इनको फ्लैट, घर तक खर्च देना पड़ रहा है. सरकार को यह भार करोड़ों रुपए में लग रहा है, जिसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है.

पार्षद, विधायक की वोट की राजनीति और सड़क वर्षो से अधूरी
शहर की मास्टर प्लान की सड़कें नहीं बनने का कारण यह है कि पार्षद और विधायक अपने मतदाताओं के कारण बस्ती और बाधक हटाने नहीं देते है. सड़कें आधी अधूरी बन कर पड़ी है, जिनका उपयोग वहां चालकों और आम जनता नहीं कर पा रही है. नतीजा यातायात जाम के रूप में पूरे शहर में सबको भुगतना पड़ रहा है.

अब चल रही है तोड़फोड़
नगर निगम शहर में अब बाधक हटाने के लिए बुलडोजर चला रहा है. शहर अभी एमआर 5 सड़क और आईडीए की एमआर 12 सड़क पर ईट भट्टे हटाने की कार्रवाई की गई है.

मंत्री के सामने भी उठा मामला
पिछले हफ्ते नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के सड़कों को चौड़ी करने में तोड़फोड़ का विधायक मेंदोला और गोलू शुक्ला ने विरोध किया था. जनता के नुकसान की बात सामने रखी गई, जिसको कलेक्टर और निगमायुक्त ने फ्लैट देने का नियम बताया. प्लॉट देने का नियम नहीं है, यह जानकारी सामने आई थी. मंत्री विजयवर्गीय ने स्पष्ट किया कि फिर सड़कें चौड़ी कैसे होगी और यातायात व्यवस्था कैसे सुधारें? इसलिए मकान और बाधक तो टूटेंगे

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