हाईकोर्ट का अहम आदेश
जबलपुर: हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत तथा जस्टिस विवेक जैन ने अपने अहम आदेश में कहा है कि बैंक अधिकारी को अनिर्वाय सेवानिवृत्ति गलत तरीके से प्रदान की गयी थी। कर्मचारियों के सेवाकाल की गणना में कर्मचारी को सीआरएस देने तथा उसे सेवा में वापस लेने का अवधि को भी शामिल किया जाये। युगलपीठ ने बैंक ऑफ इंडिया की अपील को खारिज करते हुए बैंक अधिकारी को सभी लाभ प्रदान करने के आदेष जारी किये है।
बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से दायर अपील में एकलपीठ के उक्त आदेष को चुनौती दी गयी थी,जिसमें सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी के पक्ष में आदेष जारी किया गया था। इसके अलावा सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी ने भी अपील दायर की थी। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि नर्मदा प्रसाद चौधरी जून 2013 में वरिष्ठ जुलाई 1974 में प्रारंभ हुई थी। उन्हें जनवरी 2002 में अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान कर दी थी। हाईकोर्ट व सर्वोच्च न्यायालय ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को अवैधानिक करार दिया था। जिसके बाद नर्मदा प्रसाद चौधरी को सितम्बर 2009 को सेवा में वापस लिया गया।
सेवानिवृत्ति के बाद बैंक द्वारा कुल सेवा में सीआरएस दिये जाने से लेकर वापस सेवा में लिये जाने की गणना नहीं की गयी थी। जिसे चुनौती देते हुए सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी के पक्ष में आदेष जारी किये थे। जिसके खिलाफ बैंक ऑफ इंडिया तथा सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी ने अपील दायर की थी। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने बैंक ऑफ इंडिया की अपील खारिज करते हुए सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी को लगभग आठ साल का वेतन,फिटमेंट प्रमोशन सहित अन्य लाभ का भुगतान आठ प्रतिशत ब्याज सहित करने के आदेष जारी किये है। सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी ने सुनवाई के दौरान अपना पक्ष स्वयं रखा।
