मिश्रा और चावड़ा के सामने चुनौतियां

सियासत

इंदौर नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा और ग्रामीण अध्यक्ष श्रवणसिंह चावड़ा के समक्ष पद संभालने के बाद अलग-अलग तरह की चुनौतियां सामने आने वाली हैं. सुमित मिश्रा के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती गौरव रणदिवे के कार्यकाल से अच्छा काम करने की यानी अपनी लकीर बड़ी करने की चुनौती है. गौरव रणदिवे ने अपने लगभग पौने पांच साल के कार्यकाल में भाजपा को प्रत्येक स्तर के चुनाव में सफलता दिलवाई. इसके अलावा उन्होंने पार्टी के हर कार्यक्रम और सर्कुलर का अक्षरशः पालन किया.

आजीवन श्रद्धा निधि हो या सदस्यता अभियान हो या मतदान केंद्र तक समिति गठित करने का मामला हो, सभी में गौरव रणदिवे के कार्यकाल में नगर भाजपा ने प्रदेश स्तर पर अव्वल स्थान प्राप्त किया. जाहिर है सुमित मिश्रा को यह रिकार्ड बरकरार रखना होगा. सुमित मिश्रा के लिए आसानी यह है कि उन्हें कैलाश विजयवर्गीय, शंकर लालवानी, रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला, महेंद्र हार्डिया, मधु वर्मा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव का पूरा समर्थन मिलेगा.

केवल मालिनी गौड़ से समर्थन लेने में उन्हें दिक्कत आ सकती है. दूसरी ओर ग्रामीण भाजपा में नगर से ज्यादा गुटबाजी है. एक तरफ नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विशाल पटेल, अंतरसिंह दरबार, चिंटू वर्मा जैसे नेता रहेंगे तो दूसरी तरफ कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट, उषा ठाकुर और मनोज पटेल जैसे नेता रहेंगे. इनमें भी मनोज पटेल और श्रवण सिंह चावड़ा में बिल्कुल नहीं बनती. 2023 के चुनाव में देपालपुर विधानसभा क्षेत्र से श्रवणसिंह चावड़ा ने मजबूत दावेदारी दिखाई थी और मनोज पटेल का विरोध किया था. जाहिर है श्रवण सिंह चावड़ा को ग्रामीण भाजपा में सबको साथ लेकर चलना एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है.

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