बाइस माह में छ: बार तबादला एवं फेरबदल, हाईकोर्ट से स्टे

मामला सहायक यंत्री का, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने प्रभार छीन कर कार्यपालन दफ्तर में सम्बद्ध करने जारी किया था आदेश

सिंगरौली: जिला पंचायत दफ्तर अब लगातार अपनी कार्यप्रणालियों के चलते सुर्खियों में आ गया है।इस बार उच्च न्यायालय के आदेश को न मानने का मामला सामने आया प्रभारी सहायक यंत्री ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जहां सीईओ जिला पंचायत के द्वारा 21 दिसंबर को जारी आदेश के अगली सुनवाई तक के लिए रोक लगा दिया गया है। इसके बावजूद जिला पंचायत सीईओ उच्च न्यायालय के आदेश को मानने के लिए अभी तक तैयार नही हुए हंै। जबकि उच्च न्यायालय के आदेश जारी होने के 20 दिन हो गए है। वही प्रभारी सहायक यंत्री एक अरूण कुमार चतुर्वेदी ने न्यायाधीश उच्च न्यायालय जबलपुर के यहां लिखित शिकायत पत्र देकर नौकरी एवं पद की सुरक्षा करने एवं अधिकारियों के प्रताड़ना से मुक्ति कराए जाने की मांग की है।

दरअसल प्रभारी सहायक यंत्री अरुण कुमार चतुर्वेदी 18 जनवरी 2020 को जनपद पंचायत देवसर में पदस्थ हुए। 7 सितंबर 2020 को मुख्य अभियंता के द्वारा अरुण कुमार चतुर्वेदी को सहायक यंत्री के साथ-साथ अनुविभागीय अधिकारी के पद का जिम्मा सौंपा गया । इसके बाद अरुण कुमार चतुर्वेदी विभागीय कामकाज करने लगे। इसी बीच 27 मार्च 2023 को जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने अरुण कुमार चतुर्वेदी का बैढ़न के लिए तबादला कर दिया। इसके बाद 4 मई को प्रभारी सहायक यंत्री की ग्रामीण सेवा उपसंभाग देवसर में बिना पद के संलग्न कर दिया। 30 जून को केवल विभागीय कार्य करने के लिए कार्यपालन यंत्री द्वारा आदेश जारी किया गया।

तत्पश्चात 26 जुलाई को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत के द्वारा जनपद पंचायत देवसर के सहायक यंत्री का प्रभार दिया गया और अंत में 21 दिसंबर 2024 को प्रभारी सहायक यंत्री को ग्रामीण यांत्रिकी सेवा सिंगरौली में संलग्न कर दिया। 21 दिसम्बर को सीईओ के द्वारा जारी आदेश के विरूद्ध एके चतुर्वेदी ने उच्च न्यायालय जबलपुर के वरिष्ट अधिवक्ता केसी घड़ियाल एवं साथ ही कपिल शर्मा के माध्यम से न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा के खण्ड पीठ में याचिका लगाई गई। जिसमें प्रमुख सचिव मध्य प्रदेश शासन, मुख्य अभियंता, कलेक्टर सिंगरौली एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सिंगरौली सूरज मिश्रा प्रभारी सहायक यंत्री के विरूद्ध अपील कि गई। जहा न्यायमूति विशाल मिश्रा के खण्ड पीठ के द्वारा उक्त प्रकरण की सुनवाई किये जाने के बाद सीईओ जिला पंचायत सिंगरौली के द्वारा 21 दिसम्बर 2024 के आदेश को अगली सुनवाई की तारीख तक रोक लगा दी गई है।
8 जनवरी को जारी हुआ था स्टे आर्डर
उच्च न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश 8 जनवरी को जारी किया गया था। लेकिन 20 दिन बाद भी उच्च न्यायालय के आदेश का पालन जिला पंचायत के सीईओ के द्वारा नही किया गया। वही प्रभारी सहायक यंत्री का आरोप है की उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी 13 जनवरी को उपयंत्री के रू प में कार्य करने का आदेश जारी किया गया है। वही आगे यह भी कहा है कि सीईओ एवं कार्यपालन यंत्री आरईएस के द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। शिकायत पत्र में अन्य गंभीर आरोप लगा कर सनसनी फैला दिया है।
प्रभारी सहायक यंत्री ने लगाया गंभीर आरोप
प्रभारी सहायक यंत्री का आरोप है कि 27 मार्च से लेकर 8 जनवरी 2025 करीब 22 माह के दरमियान 6 बार स्थानांतरण एवं प्रभार में फेरबदल किया गया है। प्रभारी सहायक यांत्रीक ने इस संबंध में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के यहां आवेदन पत्र देकर बिंदुवार अपनी समस्या को अवगत कराते हुए सीईओ जिला पंचायत एवं कार्यपालन यंत्री आरईएस पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाया है। शिकायत पत्र में यह भी आरोप है कि उच्च न्यायालय के शरण में आने के कारण सीईओ जिला पंचायत सीईओ द्वारा कोई भी आरोप बनाकर एवं लगाकर बर्खास्त करने की धमकी दी जा रही है। यहा तक की गलत शब्दो का भी बोला गया है। यही नही सीईओ जिला पंचायत एवं कार्यपालन यंत्री के द्वारा परेशान किया जा रहा है और मुकदमें लगाने की धमकी दी जाती है। जिसके कारण मानसिक रूप से प्रताड़ित है।

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