नयी दिल्ली, 27 जनवरी (वार्ता) भारतीय मानक समय (आईएसटी) में सेकेंड के दस लाखवें अंश (माइक्रोसेकंड) के बराबर तक त्रुटिहीनता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता विभाग अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ पूरे देश में पांच प्रयोगशालाएं स्थापित करने के साथ-साथ सभी प्रशासनिक और व्यवसायिक कार्यों में आईएसटी के प्रयोग को अनिवार्य करने जा रहा है।
उपभोक्ता विभाग के विधिक माप विज्ञान प्रभाग द्वारा मसौदा विधिक माप विज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2025 को पूरे देश में भारतीय मानक समय (आईएसटी) के उपयोग को मानकीकृत और अनिवार्य बनाने वाले एक व्यापक नियम के रूप में विभाग की साइट पर प्रकाशित किया गया है। इस पर 14 फरवरी तक सुझाव और सिफारिशें आमंत्रित की गयी हैं।
इस परियोजना के तहत स्थापित इन विधिक मापविज्ञान प्रयोगशालाओं से आईएसटी का प्रसार किया जाएगा। विभाग ने इसरो के साथ मिलकर इसके लिए प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे के विकास की परियोजना शुरू की है। इसके अंतर्गत मानक समय की शुद्धता मीली सेकेंड (सेंकेट के हजारवें हिस्से) से बढ़ कर माइक्रोसेंकेंड (सेकेंड के दस लाखवें हिस्से तक) लागू होगी।
उपभोक्ता, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की सोमवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार उपभोक्ता विभाग ने ‘एक राष्ट्र, एक समय’ के लक्ष्य को प्राप्त करने और भारतीय मानक समय (आईएसटी) में सटीकता के लिए, राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (एनपीएल) और भारत अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ मिलकर मिलीसेकंड से माइक्रोसेकंड की शुद्धता के साथ आईएसटी को प्रसारित करने के लिए एक परियोजना की शुरुआत की है।
यह परिशुद्धता नेविगेशन, दूरसंचार, पावर ग्रिड सिंक्रोनाइजेशन, बैंकिंग, डिजिटल गवर्नेंस और अत्याधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें गहरे अंतरिक्ष नेविगेशन और गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाना भी शामिल है।
समय की शुद्धता की महती अनिवार्यता के बावजूद सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (आईएसपी) द्वारा आईएसटी को अनिवार्य रूप से नहीं अपनाया गया है, जिनमें से कई जीपीएस जैसे विदेशी समय स्रोतों पर निर्भर हैं। मंत्रालय का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, वास्तविक समय अनुप्रयोगों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के सुचारू रूप से संचालन के लिए सभी नेटवर्क और प्रणालियों को आईएसटी से समन्वयित करना आवश्यक है।
इसके लिए, विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 के अंतर्गत नीतिगत ढांचा, विनियमन और कानून की सिफारिश के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया गया था । उभोक्ता सचिव की अध्यक्षता में गठित इस समिति में एनपीएल, इसरो, आईआईटी कानपुर, एनआईसी, सीईआरटी-इन, सेबी और रेलवे, दूरसंचार और वित्तीय सेवाओं जैसे प्रमुख सरकारी विभागों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसकी सिफारिश पर नियमों का मासौदा जारी किया गया है।
कोऑर्डिनेटेड यूनिवर्सल टाइम (यूटीसी) पर आधारित+5:30 घंटे के ऑफसेट के साथ आईएसटी का रखरखाव भारतीय वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनपीएल) द्वारा किया जाता है।
प्रस्तावित नियमों में प्रशासनिक और वाणिज्यिक गतिविधियों को आईएसटी के साथ समन्वयित करने का आदेश है। इसमें स्पष्ट रूप से अनुमति के बिना समय के लिए किसी वैकल्पिक समय संदर्भ के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।
इन नियमों के मसौदे में वैज्ञानिक, खगोलीय और नौवहन संबंधी उद्देश्यों के लिए सरकार की पूर्व स्वीकृति के तहत छूट का प्रस्ताव है। अनुपालन की समय-समय पर ऑडिट के माध्यम से निगरानी की जाएगी, तथा नियमों के उल्लंघन के लिए दंड का भी प्रावधान है। नियमों में समन्वयन की प्रक्रिया, कार्यान्वयन के लिए दिशा-निर्देश और सटीकता के लिए मानक भी निर्धारित किए गए हैं, ताकि आईएसटी के साथ राष्ट्रव्यापी संरेखण सुनिश्चित किया जा सके और बेहतर प्रशासन, साइबर सुरक्षा और परिचालन दक्षता को सुगम बनाया जा सके।
सरकार का कहना है कि ये नियम सटीक रिकॉर्ड रखने में सहायक होंगे तथा राष्ट्रीय अवसंरचना और संचार नेटवर्क को समन्वयित करने के लिए महत्वपूर्ण तंत्र प्रदान करेंगे। ये नियम नेविगेशन, दूरसंचार, इंटरनेट, बैंकिंग, पावर ग्रिड सिंक्रोनाइजेशन, 5जी प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आईओटी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के कार्यव्यवहार में सटीकता बढ़ाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
