तीसरी पारी के लिए भानू का परफार्मेंस काम आया

मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास

झाबुआ भाजपा जिला अध्यक्ष पद पर तीसरी बार भानू भूरिया की ताजपोशी हो गई है. 19 दावेदारों की लम्बी कतार में भानू का चुना जाना पार्टी में उनके महत्व को दर्शाता है. जिलाध्यक्ष के दावेदारों में अनेक योग्य नेता थे, ऐसे में भानू का परफार्मेंस काम आया. उनके पिछले 2 कार्यकाल में पार्टी संगठन मजबूत हुआ. कभी जिला कांग्रेस के वरिष्ठ आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया का गढ़ हुआ करता था. इस गढ़ की नींव हिलाने वालों में भानू भूरिया प्रमुख रहे. उनके कार्यकाल के दौरान ही कांग्रेस को मात देकर झाबुआ विधान सभा सीट पर भाजपा का परचम लहराया था. यहां ब्यूरोक्रेट से राजनीति में उतारे गए नए नवेले नेता गुमान सिंह डामोर ने 2018 में कांतिलाल भूरिया के प्रयासों से उनके बेटे विक्रांत भूरिया की चुनावी लांचिंग पर पानी फेर शिकस्त दी थी.

इसके बाद लोकसभा चुनाव 2019 में भी भानू की संगठनात्मक क्षमता और मेहनत से झाबुआ जिले से मिली लीड के कारण रतलाम-झाबुआ सीट पर कांग्रेस को हराने में मुख्य भूमिका रही. यहां गुमान सिंह डामोर ने कांतिलाल भूरिया को हराया था. बीते विधान सभा और लोक सभा चुनाव में भी भाजपा प्रदर्शन बेहतर रहा. हालांकि झाबुआ विधान सभा सीट पर भानू हार गए, लेकिन भाजपा ने पेटलावद जीती और थांदला में उसकी पराजय में वोट का अंतर बहुत कम था. 2024 के लोक सभा चुनाव में रतलाम- झाबुआ सीट फिर भाजपा के खाते में रही. जिले की तीनों विधानसभा से भाजपा को लीड मिली. यही कारण है कि भाजपा नेतृत्व ने भानू भूरिया पर फिर विश्वास जताया और तीसरी पारी का मौका दिया.

मंजू दादू से बढ़ती नाराजगी

नेपा नगर विधायक मंजू दादू इन दिनों चौतरफा घिरी हुई हैं. मंजू दादू पर आरोप लग रहे हैं कि वे कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से दूर होती जा रही है. कार्यकर्ताओं के काम व आम लोगों की किसी समस्या का मामला सामने आता है तो मंजू दादू से समाधान के लिए संपर्क तक करना तक मुश्किल हो जाता है. वे इनका मोबाइल तक नहीं उठाती हैं. इससे भारी नाराजगी के चलते उनके समर्थक पूर्व विधायक सुमित्रा कास्डेकर से जुडऩे लगे हैं. दूसरी ओर मंजू दादू द्वारा शेखापुर ( खकनार ) डेम का निर्माण कार्य अब तक चालू नहीं करवाने से क्षेत्र के किसानों में भी नाराजगी बढ़ रही है. उल्लेखनीय है कि यह डेम विधायक मंजू दादू के पिता पूर्व विधायक राजेंद्र दादू द्वारा स्वीकृत कराया गया था.

अब मुख्यमंत्री से ही आस

गत वर्ष इंदौर शहर में गरमी शुरू होते ही पानी के लिए जनता में त्राहिमाम मचा था. लोगों में चर्चा थी कि नगर निगम में इस दौरान सिंडीकेट बनता है और नलों से पानी की आपूर्ति कंट्रोल कर कम कर दी जाती है. इसके साथ पानी का खेला प्रारंभ होता है. टैंकरों से पानी के वितरण के बहाने लाखों के वारे न्यारे होते हैं. खैर यह जांच का विषय है. इस बार अभी सर्दी गई ही नहीं, लेकिन जलापूर्ति कम कर दी गई है. जनता को अब प्रभारी मंत्री और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से ही आस है कि वे इस ओर ध्यान रखेंगे. गरमी के मौसम में पानी के कृत्रिम अभाव से मुक्ति दिलाएंगे.

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