भाजपा, आप राजनीतिक लाभ के लिए करती हैं ध्रुवीकरण की राजनीति : खुर्शीद

नयी दिल्ली, 20 जनवरी (वार्ता) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आम आदमी पार्टी (आप) पर निजी लाभ के लिए ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दिल्ली में सत्तारूढ आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर राजधानी क्षेत्र में पिछले संप्रदायिक दंगाें पर राजनीतिक चुप्पी साधने का तीखा आरोप भी लगाया।

श्री खुर्शीद ने सोमवार को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के कार्यालय राजीव भवन में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ‘‘जहांगीर पुरी और पूर्वी दिल्ली इलाकों में उनके कार्यकाल में हुए सांप्रदायिक हिंसा के समय न तो उन क्षेत्रों का दौरा किया न ही पीड़ित और असुरक्षित समुदायों के पक्ष में सार्वजनिक रूप से कुछ बोला।” उन्होंने आप से सवाल किया , “दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में श्री केजरीवाल ने क़्यों चुप्पी साधे रखी? तब से लेकर अब तक आप ने प्रभावित समुदायों की समस्याओं का समाधान करने और उनका विश्वास बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए हैं, विशेष रूप से जहांगीर पुरी और पूर्वी दिल्ली जैसे क्षेत्रों के लिए?”

इस दौरान उन्होंने बिलकिस बानो मामले का उल्लेख करते हुए कहा, “बिलकिस बानो मामले ने जाति धर्म से परे जाकर देश की संवेदनाओं को झकझोर दिया था, लेकिन तब आप के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उस शर्मनाक घटनाक्रम की निंदा करने या उसपर किसी तरह की टिप्पणी करने से स्पष्ट इंकार कर दिया था। इससे न्याय के प्रति आप की प्रतिबद्धता को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं। उस मामले के लिए ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने या पीड़िता के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए आपने क्यों कुछ नहीं किया?”

उन्होंने सवाल किया कि शाहीन बाग में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) जैसे भेदभाव भरे कानूनों के खिलाफ शान्तिपूर्ण विरोध के दौरान क्षेत्र को “ख़ाली कराने” को लेकर आपने (श्री केजरीवाल) जो बयान दिया था, उससे उस दौरान हो रहे प्रदर्शनों की वैधता को लेकर गंभीर सवाल उठे और विशेष समुदायों की आवाज़ और कमज़ोर हुई। क्या नागरिक स्वतंत्रता और असहमति के प्रति आप का यही दृष्टिकोण है?

उन्होंने कहा, “कोराना महामारी के दौरान निजामुद्दीन मरकज को लेकर जिस तरह से एक समुदाय विशेष को दोषी ठहराया गया, उससे सांप्रदायिक तनाव बढ़ा। आप की सरकार ने उस घटना को इस तरह से संभाला, जिससे लगा कि एकता की भावना को मजबूत करने की बजाय विभाजन की राजनीति को बढ़ावा दिया गया है। आप की सरकार ने उस विभाजनकारी नैरेटिव का मुक़ाबला करने और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए क्या किया था?”

उन्होंने पवित्र क़ुरान शरीफ़ की बेअदबी और बौद्ध भिक्षु, रविदास मंदिर और वाल्मीकि मंदिर के पुजारियों की अनदेखी को लेकर भी आप को कटघड़े में खड़ा किया। इस दौरान उन्होंने आप को दलित विरोधी बताया और कहा कि दलित की आवाज उठाने पर श्री केजरीवाल ने अपने पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

उन्होंने भाजपा पर भी संप्रदायिक एवं विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया है।

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