ग्वालियर: साक्षी परिसर स्थित विद्याधाम में आज रविवार, 19 जनवरी को भव्य स्तर पर आयोजित हो रहे चांदी के 17 किलो वजनी जिनबिंब निर्माण के लाइव आयोजन एवं कुमकुम पत्रिका लेखन महोत्सव की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। ग्वालियर के लोग पहली बार चांदी की विशाल दिव्य जैन प्रतिमा की ढलाई अपने सामने होते देखेंगे। इस नवनिर्मित जिनबिंब प्रतिमा को पंचकल्याणक महोत्सव के उपरांत साक्षी परिसर के समीप निर्मित किए जा रहे भव्य आदिनाथ जिनालय में विधि विधान से पूजा कर विराजा जाएगा।
जैन समाज के मीडिया प्रभारी ललित जैन ने बताया कि विद्याधाम में आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी ने धर्मप्रेमीजन को जैन प्रतिमाओं का महत्व समझाते हुए कहा कि जैन धर्म में प्रतिमा एक ऐसा चरण या अवस्था है जो एक सामान्य व्यक्ति के आध्यात्मिक उत्थान को चिह्नित करता है। ऐसे ग्यारह चरण हैं जिन्हें प्रतिमा कहा जाता है। ग्यारह चरणों को पार करने के बाद, व्यक्ति
अब श्रावक नहीं रह जाता बल्कि मुनि बन जाता।
आर्यिकारत्न मातुश्री ने
जैन प्रतिमा विज्ञान के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराते हुए जैन धर्म में पूजी जाने वाली मूर्तियों के बारे में ज्ञानवर्धक जानकारी दी। जैन प्रतिमाओं का निर्माण और उनका ऐतिहासिक महत्व भी समझाया। उन्होंने कहा कि यह सब प्रतिमा विज्ञान के अंतर्गत आता है. जैन प्रतिमाओं में तीर्थंकरों, यक्ष-यक्षी युगलों, विद्यादेवियों और सरस्वती जैसी मूर्तियां शामिल हैं. हम 24 तीर्थंकरों की मूर्तियां पूजते हैं. जैन मूर्तियां, जैन कला का एक उदाहरण हैं. ये मूर्तियां, कठोर तप के आदर्श को दिखाती हैं. जैन मूर्तियों में तीर्थंकरों के वक्ष के मध्य में श्रीवत्स होता है. मूर्तियों में, सिर के ऊपर तीन छत्र होते हैं. जैन मूर्तियों में, चेहरे की कोई खास विशेषताएं नहीं होतीं. जैन मूर्तियों में, कपड़े या हेयर स्टाइल नहीं होते. जैन मूर्तियों में, पार्श्वनाथ को छोड़कर बाकी तीर्थंकरों को प्रतीक या लंचना के आधार पर पहचाना जा सकता है.
आर्यिका पूर्णमति माताजी के सांनिध्य में विद्याधाम, सिरौल चौराहे पर चांदी के 11 किलो वजनी जिनबिम्ब निर्माण की ढलाई का रविवार 19 जनवरी को दोपहर 1 बजे से आयोजन होगा। ग्वालियर के लोग पहली बार चांदी से निर्मित इस भव्य जिन प्रतिमा को बनते हुए देखेंगे। इस अवसर पर कुमकुम पत्रिका लेखन समारोह भी होगा जिसमें ग्वालियर नगर के 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के पुरूष वर्ग शेरवानी, फैन्सी कुर्ता पाजामा में आमन्त्रित किए गए हैं। कार्यक्रम के उपरान्त राजेश अर्चना जैन, गौशाला परिवार के सौजन्य से सभी के लिए वात्सल्य भोज होगा।
