
भिंड। श्री ब्रम्हेश्वर महादेव सेवान्यास ट्रस्ट द्वारा कई वर्षों से अपनी संपत्तियों का अनुचित तरीके से उपयोग करने और आय छुपाने के आरोप सामने आए हैं। ट्रस्ट ने अपनी जमीन और धर्मशाला से अर्जित आय को रजिस्टर नहीं किया, जिसके चलते भिंड कलेक्टर न्यायालय ने इस मामले की जांच कराने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने ग्वालियर में सीए अशोक विजयवर्गीय को ट्रस्ट की संपत्तियों का ऑडिट करने का निर्देश दिया है, ताकि ट्रस्ट पर किसी भी प्रकार की वित्तीय देनदारी की स्थिति का पता लगाया जा सके।
श्री ब्रम्हेश्वर महादेव सेवान्यास ट्रस्ट द्वारा अपनी संपत्तियों को नियमों के विपरीत लीज पर दिया गया था। ट्रस्ट ने सात साल से अधिक समय तक अपनी जमीन को अवैध तरीके से लीज पर दे रखा था। इस पर ट्रस्ट के खिलाफ आरोप लगाया गया कि उसने संपत्तियों से होने वाली आय को सही तरीके से रजिस्टर नहीं किया और आय छुपाई।
साथ ही, मौजा बक्शीपुरा में ट्रस्ट की जमीन से 4 लाख रुपये की आय हो रही थी, जबकि धर्मशाला से 1 लाख 25 हजार रुपये की आय हो रही थी। ट्रस्ट द्वारा इन सभी आय को रजिस्टर नहीं किया गया और इस प्रकार की आय की जानकारी को छुपाया गया। इस प्रकार के कार्यों से ट्रस्ट की वित्तीय स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे थे।
इतना ही नहीं, ट्रस्ट ने तीन साल से अधिक समय से 18 दुकानों को मात्र 200 रुपये के किराए पर दिया था। इन दुकानों के किराए पर कोई उचित निर्णय नहीं लिया गया और ना ही रजिस्ट्रार से अनुमति ली गई। यह भी एक बड़ा सवाल उठाता है कि ट्रस्ट ने अपनी संपत्तियों का सही तरीके से उपयोग नहीं किया और बिना अनुमति के इन दुकानों का किराया तय किया।
