
हाईकोर्ट की तल्ख़ टिप्पणी
संयुक्त बैठक कर एक सप्ताह में डिजिटलीकरण के संबंध में तैयार करें अंतिम कार्ययोजना
जबलपुर। भोपाल गैस त्रासदी के संबंध में दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत तथा जस्टिस विशाल जैन की युगलपीठ ने आदेश जारी किये है कि एक सप्ताह में राज्य सरकार के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण के सचिव तथा निर्देशक बीएमएचआरसी संयुक्त बैठक कर प्रभावित मरीजों की मेडिकल रिपोर्ट का डिजिटलीकरण करने के संबंध में अंतिम कार्य योजना तैयार करें। युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि निर्धारित बिंदुओं पर कार्य पूर्ण करने के प्रति अनावेदक गंभीर नहीं है। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 18 फरवरी को निर्धारित की है।
याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से हलफनामा में पेश किये गये जवाब में कहा गया था कि वर्ष 2014 से पूर्व के मेडिकल रिकॉर्ड बहुत पुराने हैं, इसलिए प्रतिदिन केवल 3000 पृष्ठों को ही स्कैन किया जा सकता है। अनुमान के अनुसार इस कार्य में लगभग 550 दिनों का समय लगेगा। कार्य प्रारंभ होने के बाद अंतिम समय सीमा बताई जा सकती है। इसके अलावा एनआईसी की तरफ से ई-हॉस्पिटल परियोजना के अंतर्गत क्लाउड सर्वर की स्थापना के लिए प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। वित्तीय अनुमोदन के लिए प्रस्ताव वित्त विभाग के पास लंबित है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बजट आवंटित कर दिया जाएगा। इसके बाद स्कैन किए गए अभिलेख को उक्त सर्वर में समाहित कर दिया जाएगा। एनआईसी द्वारा दिए गए प्रस्ताव के अनुसार सम्पूर्ण कार्य एक साल में पूर्ण किया जायेगा।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की ओर से दायर की गई याचिका की सुनवाई करते हुए भोपाल गैस पीड़ितों के उपचार व पुनर्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किए थे। इन बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित कर मॉनिटरिंग कमेटी का गठित की थी। कोर्ट के निर्देश थे कि मॉनिटरिंग कमेटी प्रत्येक तीन माह में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करेगी। पेश रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा केन्द्र व राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। इससे संबंधित याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा सुनवाई की जा रही थी।याचिका के लंबित रहने के दौरान मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का परिपालन नहीं किए जाने के खिलाफ भी अवमानना याचिका 2015 में दायर की गई थी।
सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त तल्ख टिप्पणी करते हुए उक्त आदेश जारी किये। याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र के रूप में अधिवक्ता अंशुमान सिंह उपस्थित हुए।
