दिल्ली विधानसभा चुनाव के पहले टूटने लगी शब्दों की मर्यादा

दिल्ली डायरी

प्रवेश कुमार मिश्र

दिल्ली विधानसभा चुनाव के पहले आरोप प्रत्यारोप का दौर अपने निचले स्तर पर पहुंच गया है. आम आदमी पार्टी व भाजपा नेताओं के बीच चल रही शाब्दिक लड़ाई मर्यादा को लांघते हुए आम मतदाताओं के बीच पहुंच गई है. पोस्टर वार में एक दूसरे को नीचा और कमजोर दिखाने के बाद अब व्यक्तिगत आक्षेप आरंभ हो गए है. पिछले दिनों भाजपा के पूर्व सांसद व कालकाजी विधानसभा क्षेत्र से पार्टी उम्मीदवार रमेश बिधूड़ी ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी व दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी पर निशाना साधते हुए व्यक्तिगत हमला बोलते हुए भाजपा को ही बैकफुट पर आने को मजबूर कर दिया. इससे पहले आप नेताओं व भाजपा नेताओं के बीच भी शब्द वार होता रहा है लेकिन इस बार जिस तरह से बहुस्तरीय बयान दिया जा रहा है उसको देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि मतदान के पहले तक भाषाई सीमा लांघने की प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने की होड़ दिखाई देगी.

एचएमपीवी की आहट से सहमी सरकार

कोरोना वायरस की भयावह पीड़ा झेल चुके आम लोगों को चीन से निकला एक नया वायरस एचएमपीवी की भारतीय सीमा में पहुंचने की आहट ने परेशान कर दिया है. केन्द्र सरकार भी इस बिमारी की दस्तक से सहमी हुई है. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एहतियातन जरूरी तैयारी आरंभ कर दी है. आम लोगों के बीच भयभीत करने वाले भ्रामक खबरों पर बारीक नजर रखी जा रही है. सभी महत्वपूर्ण अस्पतालों को एलर्ट मोड पर रखा गया है. लेकिन इन सबके बीच दिल्ली में इस बिमारी को लेकर भय का माहौल है. हालांकि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बयान जारी कर सरकारी इंतजाम के प्रति जानकारी देते हुए आम लोगों को भ्रामक खबरों को आधार बनाकर भयभीत नहीं होने की सलाह दी है.

बिहार में छात्रों के कंधों के सहारे हो रही है राजनीति

बिहार में इन दिनों राजनीतिक दलों द्वारा छात्र राजनीति को आधार बनाकर नई राजनीतिक क्रांति लाने की कोशिश की जा रही है. दरअसल बीपीएससी परीक्षा में कथित धांधली का आरोप लगाकर परीक्षार्थियों ने पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन व मार्च निकाला था. इस कार्यक्रम में जनसुराज पार्टी के संरक्षक प्रशांत किशोर भी पहुंचे थे लेकिन पांच घंटे के कार्यक्रम सम्पन्न होने के बाद पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज कर दिया. इस घटना के बाद बिहार की राजनीति गर्म हो गई. पीके पर आरोप लगे और सरकार को कटघरे में खड़ा किया जाने लगा. इसके बाद विभिन्न दलों द्वारा छात्रों के समर्थन में मार्च निकालकर उनको साधने का प्रयास आरंभ हो गया. हालांकि पिछले दिनों प्रशांत किशोर ने आमरण अनशन आरंभ किया और प्रशासन द्वारा उन्हें हटाया भी गया. लेकिन इस पूरे प्रकरण को लेकर यहीं चर्चा हो रही है कि छात्रों के कंधे के सहारे विपक्षी दलों के नेता नई राजनीति का आगाज करने की फिराक में जुटे हैं.

बूथ पर भाजपाई नेताओं की नजर

पिछले लोकसभा चुनाव व विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में जिस तरह से कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों द्वारा संविधान खतरे में है और आरक्षण खत्म किया जा सकता है का मुद्दा उठाया गया उसको लेकर भाजपाई रणनीतिकार असहज रहे हैं. उनके मुताबिक विपक्षी अभियान से उन्हें राजनीतिक नुकसान भी हुआ है इसलिए पार्टी रणनीतिकारों ने चुनाव के पहले आम मतदाताओं के बीच पहुंच कर अपना पक्ष स्पष्ट करने की रणनीति बनाई है. इसी वजह से बूथ स्तर तक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की टोली पहुंचकर न सिर्फ गोष्ठी आयोजित करेगी बल्कि वैचारिक रूप से संपन्न लोगों के साथ बौद्धिक संवाद भी स्थापित करेगी. भाजपा के इस अभियान को लेकर दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चा भी हो रही है. कुछ लोग इसे गृहमंत्री अमित शाह के बयान को आधार बनाकर डैमेज कंट्रोल की रणनीति के रूप में इसे देख रहे हैं

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