
० सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में स्वीकृत 7 चिकित्सकों में सीबीएमओ सहित 3 ही चिकित्सक पदस्थ, सीबीएमओ भी कार्य के सिलसिले में अक्सर रहते हैं बाहर
नवभारत न्यूज
सीधी/मझौली 6 जनवरी। जिले का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मझौली चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। यहां स्वीकृत 7 चिकित्सकों में सीबीमएओ सहित 3 ही चिकित्सक पदस्थ हैं। सीबीएमओ भी विभागीय कार्य के चलते अक्सर बाहर रहते हैं। ऐसे में दो चिकित्सक के सहारे ही सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का संचालन हो रहा है।
बताते चलें कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मझौली 30 बिस्तरा अस्पताल है। यह अवश्य है कि विधानसभा चुनाव के पूर्व धौंहनी विधायक कुंवर सिंह टेकाम की पहल पर इसको 50 बिस्तरा घोषित कर दिया गया है। पुराने अस्पताल भवन की व्यवस्थाओं को बढ़ाने के लिये नये निर्माण कार्य भी शुरू करने के लिये ड्राइंग बनाकर स्वीकृति के लिये भोपाल भेजा गया है। भवन निर्माण के लिये साढ़े 11 करोड़ बजट की स्वीकृति भी मिली है किन्तु अभी तक नये अस्पताल भवन के कार्य का शिलान्यास तक नहीं हो पाया है। इस वजह से यहां 50 बिस्तरा अस्पताल की सुविधा भी नहीं बन पा रही है। अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी होने के कारण मरीजों को काफी समस्याएं हैं। खासतौर से महिला डॉक्टर के न होने से महिला मरीजों को उपचार के लिये बाहर जाने की मजबूरी बनी हुई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मझौली में सबसे बड़ी कमी डॉक्टरों की है। यहां पदस्थ डॉ.राकेश तिवारी की पोस्टिंग प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मड़वास में है लेकिन मझौली में डॉक्टरों की भारी कमी के चलते इनको मझौली अस्पताल में अटैच कर मरीजों को सेवाएं दिलाई जा रही हैं। डॉ.तिवारी ही इकलौते ऐसे डॉक्टर हैं जो नियमित रूप से मरीजों को सेवा देने के लिये उपलब्ध रहते हैं। यहां हाल ही में डॉ.कृष्णा कोल को पदस्थ किया गया है। वे भी नियमित रूप से अस्पताल में नहीं आते। ऐसे में मझौली अस्पताल में स्वीकृत डॉक्टरों के सभी खाली पदों को जल्द भरने की जरूरत है। मझौली अस्पताल में स्टाफ नर्स, कम्पाउंडर, लैब टेक्रिशियन समेत अन्य स्टाफ आवश्यकता के अनुसार पदस्थ है लेकिन डॉक्टरों की कमी के चलते जो स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिये, नहीं मिल पा रही हैं। चर्चा के दौरान अस्पताल आये कुछ मरीजों का कहना था कि सीबीएमओ डॉ.पी.एल.सागर अस्पताल में कभी-कभार ही दिखते हैं। किन्तु डॉ.राकेश तिवारी जरूरत नियमित रूप से मरीजों की बीमारी को देखने के लिये बैठते हैं। उनके द्वारा सभी मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं। उनके कारण ही दूर-दूर से मरीज उपचार कराने के लिये मझौली अस्पताल आ रहे हैं। यदि डॉ.तिवारी मौजूद न रहें तो मरीजों को झोलाछाप डॉक्टरों की शरण में ही उपचार कराने के लिये जाना पड़ेगा।
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डॉ.तिवारी अकेले ही देखते हैं मरीज
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मझौली में करीब 5 वर्षों से अटैच से पदस्थ डॉ.राकेश तिवारी नियमित रूप से मरीजों को देखने के लिये उपलब्ध रहते हैं। उनके द्वारा ही अपने कार्यकाल में मरीजों को समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं। वहीं सीबीएमओ विभागीय कार्यों में व्यस्त रहने के कारण नियमित रूप से अस्पताल में मौजूद नहीं रहते। वहीं डॉ.तिवारी के पास पूर्व में बीएमओ का भी प्रभार था, इसके बावजूद वह मरीजों को देखने के लिये विशेष तौर पर समय निकाल लेते थे। क्षेत्रीय मरीजों में डॉ.तिवारी को लेकर काफी संतुष्टि बनी हुई है।
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मझौली अस्पताल में नहीं आई एक्स-रे मशीन
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मझौली में किसी तरह टेक्निशियन की पदस्थापना हाल ही में हुई लेकिन एक्स-रे मशीन के अभाव में मरीजों का एक्स-रे नहीं हो पा रहा है। आरंभ में रेडियो टेक्निशियन की पदस्थापना न होने से करीब एक दशक से एक्स-रे बंद था। बाद में टेक्निशियन की पदस्थापना हुई लेकिन एक्स-रे मशीन अभी तक मझौली अस्पताल में नहीं आई। बताया गया है कि भोपाल से छोटी एक्स-रे मशीन दी जा रही है। लेकिन धौंहनी विधायक इस प्रयास में हैं कि यहां बड़ी मशीन ही आये।
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इनका कहना है
सीएचसी मझौली में उनके साथ दो अन्य डॉक्टर हैं। वे शहडोल में 10 साल तक पदस्थ थे इस वजह से काफी संख्या में पोस्टमार्टम कार्य किया था। इसी वजह से कोर्ट में गवाही के सिलसिले में उनको अक्सर शहडोल जाना पड़ता है। मीटिंग वगैरह में व्यस्तता नहीं रहती तो अस्पताल में रहते हैं। अस्पताल में रेडियो टेक्निशियन की पदस्थापना हो गई है लेकिन भोपाल से छोटी एक्स-रे मशीन दी जा रही है। विधायक जी का कहना है कि बड़ी मशीन ही मझौली में लगनी चाहिये, जिससे मरीजों को भविष्य में भी अच्छी सुविधा मिले।
डॉ.पी.एल.सागर, सीबीएमओ, सीएचसी मझौली
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