ज्ञान महाकुंभ का आयोजन प्रयागराज में 10 जनवरी से

भोपाल, 03 जनवरी (वार्ता) उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में इसी माह प्रारंभ होने वाले विश्व प्रसिद्ध “महाकुंभ” के दौरान आगामी 10 जनवरी से “ज्ञान महाकुंभ” का आयोजन प्रारंभ होगा, जो एक माह तक चलेगा।

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की ओर से आयोजित “ज्ञान महाकुंभ” के दौरान एक माह तक प्रयागराज में श्रंखलाबद्ध तरीके से विभिन्न आयोजन होंगे, जो मुख्यत: शिक्षा, ज्ञान और संस्कृति पर केंद्रित रहेंगे। इन आयोजनों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सह सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा से जुड़े केंद्रीय संस्थानों के पदाधिकारी, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति और शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञ सहभागिता करेंगे।

न्यास के सचिव डॉ अतुल कोठारी ने आज यहां पत्रकार वार्ता में बताया कि प्रयागराज में 10 जनवरी को ज्ञान महाकुंभ का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया है। ज्ञान महाकुंभ से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, भारतीय ज्ञान परंपरा के शिक्षा में समावेश को गति मिलेगी।

डॉ कोठारी ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ में देश भर के साधु संत, सन्यासी एकसाथ इकट्ठे होते हैं और देश की जनता का धार्मिक मार्गदर्शन करते हैं। इसलिए इस दौरान ज्ञान महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश के शिक्षा जगत से छात्र, आचार्य, शिक्षाविद, शोधार्थी और शिक्षा से जुड़े शासन प्रशासन के पदाधिकारी और अन्य लाेग शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि इस दौरान देश की शिक्षा में आधारभूत परिवर्तन की प्रक्रिया को गति देने के संबंध में चिंतन मनन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत को “विश्व गुरू” बनाने के लिए यह सब आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ज्ञान महाकुंभ के आयोजन के पहले न्यास के द्वारा देश की चारों दिशाओं में भारतीय शिक्षा के महत्वपूर्ण केंद्र हरिद्वार, नालंदा, पुडुचेरी और कर्णावती (अहमदाबाद) में ज्ञानकुंभ संपन्न हो चुके हैं। इस दौरान शिक्षा जगत से जुड़ीं विभिन्न चुनौतियों का मंथन किया गया और ज्ञान महाकुंभ में इन्हीं के आधार पर आगे का मंथन होगा।

डॉ कोठारी ने कहा कि 10 जनवरी को ज्ञान महाकुंभ के उद्घाटन के बाद 31 जनवरी को हरित महाकुंभ का आयोजन होगा। एक फरवरी को “एक राष्ट्र, एक नाम, भारत” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी होगी। इसके बाद सात, आठ और नौ फरवरी को भारतीय शिक्षा की राष्ट्रीय संकल्पना विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि एक माह के दौरान शैक्षिक प्रदर्शनी का आयोजन, साहित्य वितरण, विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं, वैदिक गणित, सूचना प्रौद्योगिकी का शिक्षण, संस्कृत संभाषण वर्ग आदि कार्यक्रम होंगे। साथ ही विभिन्न अखाड़ों के साधु संतों के साथ मिलकर शैक्षिक संगोष्ठियां आयोजित की जाएंगी।

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