संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80 वें सत्र में जलवायु परिवर्तन एक बार फिर केंद्र में रहा. इस बार बहस केवल कार्बन उत्सर्जन तक सीमित नहीं रही, बल्कि “जलवायु न्याय” और “वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं” पर भी गहराई से चर्चा हुई. यह वह मोड़ है जहां भारत ने न सिर्फ अपनी […]
संपादकीय
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संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुलाकात ने दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती दी है. यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच कुछ आर्थिक तनाव के बावजूद रणनीतिक […]
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन वस्तुत: अर्थव्यवस्था और नागरिक जीवन को एक नई दिशा देने वाला संदेश है. इसमें नवरात्र के पावन अवसर पर उन्होंने ‘बचत उत्सव’ का आह्वान किया, जो न केवल त्योहारों की खुशियों को बढ़ाता है बल्कि आर्थिक सुधारों की ठोस तस्वीर भी प्रस्तुत […]
दोहा में हाल ही में संपन्न अरब-इस्लामी सम्मेलन ने पश्चिम एशिया की राजनीति को नई दिशा देने वाले कई सवाल खड़े कर दिए हैं. इजरायल के हमले के बाद कतर की अगुवाई में जुटे नेताओं ने पहली बार इतनी खुलकर नाटो जैसी सुरक्षा छतरी की जरूरत पर बल दिया. फिलिस्तीन […]
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पराली जलाने की समस्या पर जो कड़ा रुख अपनाया है, वह केवल न्यायपालिका की चिंता नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक बेचैनी को दर्शाता है. हर साल अक्टूबर-नवंबर में उत्तर भारत की हवा जहरीली हो जाती है और लाखों लोगों के स्वास्थ्य पर संकट मंडराने […]
इंदौर के एयरपोर्ट रोड पर हुआ ट्रक हादसा केवल एक दुखद घटना नहीं, बल्कि हमारी स्थानीय प्रशासन की असफलताओं का प्रमाण है. सडक़ पर भीड़, असावधान ट्रैफिक मैनेजमेंट और नियमों की धज्जियां उड़ाता पुलिस और परिवहन तंत्र,सब मिलकर यह साबित करते हैं कि आम आदमी का जीवन इस देश में […]
सुप्रीम कोर्ट का सोमवार का अंतरिम आदेश वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को लेकर जारी बहस को नई दिशा देता है. अदालत ने पूरे कानून को निलंबित करने से साफ इंकार किया है, किंतु कुछ संवेदनशील प्रावधानों पर तत्काल रोक लगाकर यह संकेत भी दिया है कि संविधान और न्यायिक परंपरा […]
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मणिपुर दौरा, हिंसा के दो वर्ष बाद भले ही देर से हुआ हो, लेकिन उसका संदेश स्पष्ट और ठोस था—शांति और विकास ही राज्य की असली दिशा है. 7,000 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाएं और विस्थापित परिवारों के लिए 3,000 करोड़ रुपए का पैकेज यह दर्शाता […]
नेपाल और फ्रांस ! दो भौगोलिक रूप से दूरस्थ और सांस्कृतिक रूप से भिन्न देश, लेकिन दोनों की सडक़ों पर इस समय एक समान दृश्य है, असंतोष, आक्रोश और हिंसा. एक ओर नेपाल का राजनीतिक संकट अंतरिम व्यवस्था की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है, तो दूसरी ओर फ्रांस की […]