नयी दिल्ली 20 अगस्त (वार्ता) आम आदमी पार्टी (आप) ने कहा कि मोदी सरकार चोर दरवाजे से एससी, एसटी, ओबीसी के आरक्षण का हक मार रही थी लेकिन जब चारों तरफ से उस पर दबाव पड़ा तो उसने मजबूरी में लेटरल इंट्री आदेश को वापस ले लिया।
आप के वरिष्ठ नेता जस्मीन शाह ने आज कहा कि भाजपा संविधान को खत्म करके जिस आरक्षण को खुलेआम खत्म करना चाहती थी, जनता का जनादेश उसके पक्ष में न जाने के बाद अब वह उसे चोरी-छिपे अंजाम देने की कोशिश कर रही है। सबसे पहले एक मामला सामने आया, जिसमें भाजपा ने आईएएस अधिकारी, डायरेक्टर और अंडर सेक्रेटरी जैसे बड़े-बड़े 45 सरकारी पदों पर लेटरल एंट्री के लिए विज्ञापन निकाला, जिसमें आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं थी। चारों तरफ से दबाव पड़ने के बाद केंद्र सरकार ने लेटरल इंट्री से 45 पदों को भरने का आदेश मजबूरी में वापस लिया है। यह पहली बार नहीं है कि भाजपा ऐसा पाप कर रही है। मोदी सरकार 2018 से 2024 के बीच अब तक 63 पदों को लेटरल एंट्री के माध्यम से भर चुकी है, जहां आरक्षण लागू नहीं था।
उन्होंने कहा कि यह कोई इकलौता मामला नहीं है। भाजपा शासित राज्य सरकारों में भी यही हो रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार पिछले 4-5 सालों से 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती कर रही थी, लेकिन उसमें एससी, एसटी समाज के युवाओं को अपने हक की नौकरियां नहीं मिलीं। ओबीसी समाज को 27 फीसदी आरक्षण मिलता है, लेकिन योगी सरकार ने केवल 4 फीसद युवाओं को नौकरी दी। एससी समाज को 21 फीसद का आरक्षण मिलता है, लेकिन योगी सरकार ने केवल 16 फीसद युवाओं को रोजगार दिया। युवाओं ने आवाज उठाई, लेकिन भाजपा सरकार ने उनकी एक न सुनी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला लेकर संविधान की रक्षा की और इन भर्तियों को खारिज किया।
आप नेता ने कहा कि पिछले कई दशकों से भाजपा का केवल एक ही प्रयास है कि किस तरह पिछड़े और वंचित समुदायों के युवाओं को दबाया जाए और उन्हें सरकारी नौकरियां न दी जाएं। इससे पहले 40 विश्वविद्यालयों में दाखिलों के समय आरक्षण को हटा दिया गया था।
आप नेता कुलदीप कुमार ने कहा कि भाजपा हमेशा बाबा साहब अंबेडकर के संविधान के विरोध में रही है। भाजपा हमेशा से संविधान की आलोचना करती आई है और उसे बदलने की बात करती रही है। वर्ष 2024 में भी उसने संविधान को बदलने की बात कही थी लेकिन देश के पिछड़े समाज ने इस बार भाजपा को सबक सिखा दिया। यह बेहद गंभीर विषय है कि बाबा साहब अंबेडकर ने अपने प्रयासों से जिन दबे-कुचले वर्गों को समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया था, आज भाजपा पिछले दरवाजे से उस आरक्षण को खत्म करना चाहती है।