नयी दिल्ली, 07 नवंबर (वार्ता) भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने यूरोपीय संघ के प्रमुख अनुसंधान एवं नवाचार कार्यक्रम होराइज़न यूरोप के साथ देश की संबद्धता के लिए वार्ताएँ सफलतापूर्वक संपन्न कर ली हैं।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि इस कार्यक्रम के साथ भारत की संबद्धता दोनों पक्षों के बीच अनुसंधान सहयोग के लिए दीर्घकालिक संस्थागत ढांचे की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग पर भारत-यूरोपीय संघ समझौते तथा भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद के तहत पहले से जारी अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं और सहयोग को आगे बढ़ाएगा।
होराइजन यूरोप के स्तंभ-2 में स्वास्थ्य, डिजिटल प्रौद्योगिकियां, उद्योग एवं अंतरिक्ष, जलवायु, ऊर्जा एवं गतिशीलता, खाद्य एवं जैव-अर्थव्यवस्था शामिल हैं। ये विषय भारत की अनुसंधान प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं और देश की वैज्ञानिक क्षमताओं को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। इससे दोनों देशों के बीच सहयोग से विकसित भारत 2047 की दिशा में आगे बढ़ते हुए देश के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को महत्त्वपूर्ण मूल्यवर्धन में मदद मिलेगी।
इस संबद्धता से भारतीय शोधकर्ताओं, संस्थानों और उद्योग जगत को सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजनाओं के माध्यम से कार्यक्रम के अंतर्गत वित्तपोषण हेतु आमंत्रित प्रस्तावों में भाग लेने तथा यूरोपीय संघ के संघों और अत्याधुनिक अनुसंधान अवसंरचना तक पहुंच प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इससे प्रतिभाओं की आवाजाही को भी बढ़ावा मिलेगा और महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, मानकों तथा समाधानों का व्यापक स्तर पर संयुक्त विकास संभव हो सकेगा।
इस दिशा में पहल की शुरुआत 27 जनवरी 2026 को आयोजित ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के बाद हुई थी और औपचारिक वार्ता 15 जुलाई 2026 को ब्रशेल्स में आयोजित व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की मंत्रिस्तरीय बैठक के परिणामस्वरूप शुरू की गई।
