शिलांग, 07 नवंबर (वार्ता) मेघायल में शिलांग रोपवे परियोजना के खिलाफ ‘संयुक्त कार्रवाई समिति ‘ (जेएसी) के सदस्यों ने शुक्रवार को धरना-प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से 151 करोड़ रुपये की इस परियोजना को तुरंत रद्द करने की मांग की।
यह विरोध प्रदर्शन सरकार की ओर से 913 मीटर लंबी रोपवे परियोजना को रद्द करने से इनकार करने के बाद हुआ।
प्रदर्शनकारियों में ज्यादातर महिलाएं थीं, जिन्होंने राज्य सचिवालय से लगभग 500 मीटर दूर कियांग नांगबाह की प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन किया।
जेएसी की सदस्य वेनिटिया मावलोंग ने कहा, “आज का यह प्रदर्शन जनता को याद दिलाता है कि शिलांग रोपवे परियोजना के खिलाफ हमारा आंदोलन अभी भी जारी है। इससे सरकार और आम जनता को पता चलता है कि हम इस परियोजना का लगातार विरोध कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि जेएसी की प्राथमिकता ‘शिलांग पीक’ को बचाना है। उन्होंने किसी भी तरह के समझौते से इनकार करते हुए कहा, “हम अपनी बात पर अडिग हैं। बात एकदम साफ है कि ‘लुम शिलांग’ (शिलांग पीक) को बिल्कुल न छुएं। हम आपको ‘लुम शिलांग’ को छूने नहीं देंगे।”
पर्यटन मंत्री लिंगदोह ने गुरुवार को रोपवे परियोजना पर राज्य सरकार का रुख दोहराते हुए कहा था कि औपचारिक समझौते हो जाने के बाद इस परियोजना को वापस नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा, “इस परियोजना को पहले ही जरूरी अनुमतियां और मंजूरियां मिल चुकी हैं, इसलिए समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने के बाद इसे वापस नहीं लिया जा सकता।”
पर्यटन मंत्री ने कहा कि सरकार इन हितधारकों के साथ बातचीत जारी रखने के लिए तैयार है। उन्होंने सुझाव दिया कि इन लोगों को सिक्किम और शिमला जैसी जगहों पर ले जाया जा सकता है, जहां पहाड़ी इलाकों में पहले से ही रोपवे परियोजनाएं चल रही हैं। शिलांग रोपवे परियोजना का बचाव करते हुए श्री लिंगदोह ने कहा कि इस प्रस्ताव पर कई दशकों से विचार चल रहा था, और यह कोई हाल ही में लिया गया फैसला नहीं है।