नयी दिल्ली, 6 नवंबर (वार्ता) नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की मुंबई पीठ ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के 12,668 करोड़ रुपये के कर्ज नहीं चुकाने के मामले में वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर और निदेशक वेणुगोपाल नंदलाल धूत को दिवालिया घोषित कर दिया है।
ट्रिब्यूनल ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज और उसकी समूह संस्थाओं को दी गई कर्ज सुविधाओं के लिए निजी गारंटी देने वाले धूत के खिलाफ एसबीआई की दिवालियापन याचिका स्वीकार कर ली है।
एनसीएलटी की दो सदस्यीय पीठ ने कार्यवाही की देखरेख के लिए एक ‘बैंकरप्सी ट्रस्टी’ की नियुक्ति भी की है। ट्रिब्यूनल ने ट्रस्टी को धूत के देनदारों से दावे आमंत्रित करने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी करने का निर्देश दिया और कहा कि उनकी संपत्ति और परिसंपत्तियों को दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता के लागू प्रावधानों के तहत बांटा जायेगा।
ट्रिब्यूनल ने धूत को दिवालियापन की कार्यवाही शुरू होने के सात दिनों के भीतर निर्धारित प्रारूप में अपनी वित्तीय स्थिति का विवरण बैंकरप्सी ट्रस्टी को सौंपने का निर्देश दिया है। आदेश में कहा गया है कि आईबीसी की धारा 138 के तहत राहत मिलने तक यह कार्यवाही लागू रहेगी।
यह मामला वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड के एसबीआई और उसके तत्कालीन सहयोगी बैंकों स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर और स्टेट बैंक ऑफ पटियाला से मिले कर्ज की सुविधाओं से संबंधित है। इनका अप्रैल 2017 में एसबीआई में विलय हो गया था। वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस लिमिटेड ने भी सह-बाध्यकारी के रूप में इन सुविधाओं के एक हिस्से का लाभ उठाया था।
एसबीआई की याचिका के अनुसार, ऋण खाते डिफॉल्ट में बदल गये, जिसके बाद 30 सितंबर 2026 तक ब्याज और जुर्माने सहित कुल बकाया राशि 12,668.06 करोड़ रुपये तक पहुंच गयी। बकाया राशि में रुपये टर्म लोन सुविधा के तहत 9,322.10 करोड़ रुपये, वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस सुविधा से संबंधित 1,437.76 करोड़ रुपये और वर्किंग कैपिटल सुविधा के तहत 1,908.19 करोड़ रुपये शामिल हैं।
धूत ने बैंकों के गए कर्जों के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी। कर्ज चुकाने में नाकाम रहने के बाद, एसबीआई ने फरवरी 2018 में नोटिस जारी करके इन व्यक्तिगत गारंटियों को लागू किया और अपनी बकाया राशि की वसूली के लिए पूर्व प्रमोटर के खिलाफ कार्यवाही शुरू की।

