नई दिल्ली, जोमैटो और ब्लिंकिट की मूल कंपनी ‘इटरनल’ के वाइस चेयरमैन और संस्थापक दीपिंदर गोयल ने अपनी ब्लिंकिट एम्बुलेंस सेवा के लिए नई फीस संरचना की घोषणा की है। गोयल ने स्पष्ट किया कि गंभीर और आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की सेवा पहले की तरह पूरी तरह से मुफ्त जारी रहेगी। हालांकि, यदि कोई ग्राहक गैर-आपातकालीन स्थिति, जैसे रूटीन हेल्थ चेक-अप या अस्पताल से सामान्य डिस्चार्ज के लिए एम्बुलेंस बुक करता है, तो यात्रा पूरी होने के बाद 2,500 रुपये का शुल्क लिया जाएगा। यह दर निजी एम्बुलेंस सेवाओं के बाजार शुल्क के अनुरूप तय की गई है।
मुफ्त सेवा के दुरुपयोग के कारण लिया गया बड़ा फैसला, रूटीन चेक-अप की बुकिंग से प्रभावित हो रही थीं आपातकालीन सेवाएं
दीपिंदर गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में कंपनी ने 20,000 से अधिक आपातकालीन मामलों सहित कुल 42,000 मरीजों को बिल्कुल मुफ्त सेवा प्रदान की है। हालांकि, सेवा पूरी तरह मुफ्त होने के कारण अब लोग रूटीन चेक-अप और अस्पताल जाने-आने के लिए भी एम्बुलेंस बुक कर रहे थे, जिनका काम प्राइवेट कैब से भी चल सकता था। इस वजह से पैरामेडिक्स और जीवनरक्षक उपकरणों से लैस एम्बुलेंस मुख्य आपातकालीन समय में उपलब्ध नहीं हो पा रही थीं। इसी दुरुपयोग को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है ताकि जरूरतमंदों की जान बचाई जा सके।
नॉन-इमरजेंसी शुल्क से मिलने वाली राशि इटरनल फाउंडेशन को जाएगी, एम्बुलेंस नेटवर्क और पैरामेडिक्स ट्रेनिंग का होगा विस्तार
कंपनी के अनुसार, गैर-आपातकालीन बुकिंग से एकत्र होने वाला 2,500 रुपये का शुल्क सीधे ‘इटरनल फाउंडेशन’ को ट्रांसफर किया जाएगा, जो इन एम्बुलेंस सेवाओं का संचालन और प्रबंधन संभालता है। इस फंड का उपयोग एम्बुलेंस बेड़े का विस्तार करने और गुणवत्तापूर्ण पैरामेडिक्स को प्रशिक्षित करने के लिए किया जाएगा। दीपिंदर गोयल ने उम्मीद जताई कि इस शुल्क के लागू होने से गैर-जरूरी बुकिंग में भारी कमी आएगी और उनकी 10 मिनट वाली त्वरित एम्बुलेंस सेवा वास्तविक आपातकालीन स्थितियों में तेजी से पहुंचकर हजारों लोगों की जान बचाने का काम जारी रखेगी।

