
इंदौर। चिकित्सा के क्षेत्र में नई तकनीकों के इस्तेमाल से लेकर रोबोटिक्स और प्लाज्मा तकनीक के विकास तक, देश में वैज्ञानिक अनुसंधान के कई नए आयाम खुल रहे हैं। इन तकनीकों और उनके व्यावहारिक उपयोगों से विद्यार्थियों व शोधकर्ताओं को रूबरू कराने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क), मुंबई के वैज्ञानिकों ने विशेष सत्र आयोजित किए।
आईआईटी इंदौर और बार्क के संयुक्त तत्वावधान में हुए प्रौद्योगिकी प्रसार एवं जागरूकता कार्यक्रम में चिकित्सा प्रौद्योगिकी, प्लाज्मा प्रौद्योगिकी, न्यूट्रॉन आधारित तकनीक और रोबोटिक्स पर चार तकनीकी सत्र हुए। इनमें बार्क के वैज्ञानिकों ने अपने अनुसंधान, तकनीकी विकास और इन क्षेत्रों में भविष्य की संभावनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में इंदौर के विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों के शिक्षक, शोधकर्ता और विद्यार्थी भी शामिल हुए।
कार्यक्रम में आईआईटी इंदौर के कार्यवाहक निदेशक प्रो. देवेंद्र देशमुख और अनुसंधान एवं विकास के अधिष्ठाता प्रो. अभिरूप दत्ता मौजूद रहे। बार्क की ओर से राजेश कुमार जैन ने भी सहभागिता की। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों के बीच संवाद के जरिए अनुसंधान से जुड़े विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
अनुसंधान को प्रयोगशाला से बाहर लाने पर जोर
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू शैक्षणिक अनुसंधान और तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल के बीच तालमेल स्थापित करना रहा। चर्चा में इस बात को प्रमुखता दी गई कि देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों और राष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशालाओं के बीच सहयोग बढ़ने से नई तकनीकों के विकास और उनके उपयोग की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं। इससे विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं को भी राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे अनुसंधान कार्यों को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।
उद्यमिता को करियर विकल्प के रूप में अपनाने की सलाह
कार्यक्रम के समापन सत्र में ‘उद्यमिता क्यों?’ विषय पर प्रस्तुति दी गई। इसमें युवाओं को अपने नवाचारी विचारों को केवल शोध तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावहारिक समाधान और उद्यम का रूप देने के लिए प्रेरित किया गया। संदेश यह रहा कि वैज्ञानिक सोच और तकनीकी ज्ञान के आधार पर रोजगार तलाशने के साथ रोजगार सृजन की दिशा में भी काम किया जा सकता है।
परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत कार्यरत बार्क परमाणु विज्ञान, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा, अभियांत्रिकी और सामरिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में अनुसंधान करता है। आईआईटी इंदौर में हुए इस आयोजन के जरिए विद्यार्थियों को इन क्षेत्रों में विकसित हो रही स्वदेशी तकनीकों से परिचित होने का अवसर मिला। साथ ही, दोनों संस्थानों के बीच संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी विशेषज्ञता साझा करने और भविष्य की परियोजनाओं पर साथ काम करने की संभावनाएं भी सामने आईं।
