
झाबुआ. झाबुआ जिले में कम वर्षा के कारण संभावित पेयजल संकट से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी है। कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट के निर्देशन में ग्राम पंचायतवार जलस्रोतों की स्थिति, उपलब्ध पानी और आगामी महीनों में पेयजल व्यवस्था को लेकर कार्ययोजना तैयार की जा रही है। हाल ही में ग्राम पंचायतों में आयोजित जल चौपालों के माध्यम से जलस्रोतों की जानकारी संकलित कर पंचायतवार प्रोफाइल तैयार की गई है।
इसी क्रम में कॉलेज ऑडिटोरियम में जलदूत कार्यशाला आयोजित की गई। कलेक्टर डॉ. भरसट ने कहा कि पेयजल समस्या के समाधान के लिए प्रशासन के साथ ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। जलदूत गांव और प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेंगे। वे जलस्रोतों की स्थिति की जानकारी जुटाने, ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने और पेयजल संबंधी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने में सहयोग करेंगे। उत्कृष्ट कार्य करने वाले जलदूतों को प्रोत्साहित एवं पुरस्कृत किया जाएगा।
कलेक्टर ने बताया कि कम वर्षा के कारण इस वर्ष सिंचाई क्षेत्र में भी कमी आई है। गत वर्ष करीब 1.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हुई थी, जबकि इस वर्ष लगभग 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हुई है। उन्होंने जलदूतों को कुएं, हैंडपंप सहित सभी जलस्रोतों की स्थिति का आकलन करने तथा सफाई, गहरीकरण और वैकल्पिक जलस्रोतों से संबंधित जानकारी प्रशासन को देने के निर्देश दिए।
सीईओ जिला पंचायत जितेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि जलस्रोतों का संरक्षण और पानी का सदुपयोग प्राथमिकता है। सार्वजनिक जलस्रोतों से अनधिकृत जल दोहन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कार्यशाला में जलदूतों को जल संरक्षण, पेयजल प्रबंधन और जनजागरूकता का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही जलदूतों की जिम्मेदारियों से संबंधित पोस्टर का विमोचन किया गया। कार्यशाला में अधिकारी, कर्मचारी एवं जलदूत उपस्थित रहे।
