नई दिल्ली, भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक व रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने वाला ऐतिहासिक व्यापक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। इस दूरगामी समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने अपने बाजार में आने वाले 100% भारतीय निर्यात पर सीमा शुल्क (टैरिफ) को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही भारतीय पेशेवरों और युवाओं के लिए ‘टेम्परेरी एम्प्लॉयमेंट एंट्री वीजा’ की शुरुआत की गई है, जिसके माध्यम से आईटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, शिक्षा और शेफ जैसे क्षेत्रों के 5,000 भारतीय पेशेवर न्यूजीलैंड में 3 साल तक काम कर सकेंगे।
STEM और पीएचडी छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद रुककर काम करने का अवसर, भारत के लिए 20 अरब डॉलर के निवेश का वादा
यह समझौता न्यूजीलैंड में पढ़ाई करने की इच्छा रखने वाले भारतीय विद्यार्थियों के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आया है। समझौते के प्रावधानों के अनुसार एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्र के स्नातक छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद 3 साल तक और पीएचडी शोधार्थी 4 साल तक न्यूजीलैंड में रहकर काम कर सकते हैं। इसके अलावा, न्यूजीलैंड ने ‘मेक इन इंडिया’ और विनिर्माण बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के उद्देश्य से अगले 15 वर्षों में भारत के अंदर 20 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
भारतीय किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए डेयरी और मसालों को रखा गया बाहर, सेब, कीवी और ऊन जैसे उत्पाद होंगे सस्ते
भारत सरकार ने देश के करोड़ों छोटे किसानों और पशुपालकों की आजीविका की रक्षा के लिए डेयरी उत्पादों जैसे दूध और पनीर को इस समझौते से पूरी तरह बाहर (‘रेड लाइन’) रखा है। इसके अतिरिक्त कॉफी, चीनी, प्याज, मसाले और खाद्य तेलों पर भी शुल्क में कोई छूट नहीं दी गई है। वहीं दूसरी ओर, न्यूजीलैंड से आयात होने वाले कीवी व सेब पर लगने वाले करों में 50% तक की कटौती होगी, जबकि भेड़ के मांस, ऊन, कोयला और लकड़ी के उत्पादों पर कर तुरंत हटा दिए जाएंगे, जिससे दोनों देशों के व्यापार में अभूतपूर्व उछाल आने की उम्मीद है।

