नई दिल्ली, कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर त्योहारी सीजन के दौरान दिल्ली में होने वाली राजनीतिक रैलियों और प्रदर्शनों से व्यापारी समुदाय को हो रहे भारी नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन ने विशेष रूप से 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया गठबंधन की महारैली और उससे जुड़ी आवाजाही का उल्लेख किया, जिससे दिल्ली के प्रमुख बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां ठप हो गईं। व्यापारियों ने पत्र के जरिए सवाल उठाया कि क्या विरोध करने का अधिकार आम नागरिकों के व्यापार करने और आजीविका कमाने के मौलिक अधिकार से बड़ा है।
प्रदर्शनों की वजह से दिल्ली के व्यापारियों को हुआ 14,000 करोड़ का नुकसान, जंतर-मंतर और रामलीला मैदान में रैलियों पर रोक की मांग
व्यापारी संगठनों का अनुमान है कि पिछले एक महीने के दौरान बार-बार हुए धरना-प्रदर्शनों और रास्तों की नाकाबंदी से व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों और दिहाड़ी मजदूरों को लगभग 14,000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष नुकसान हुआ है। इस स्थिति से निपटने के लिए चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर और उपराज्यपाल को भी पत्र भेजा है। संगठन ने मांग की है कि 11 नवंबर (भाई दूज) तक कनॉट प्लेस, जंतर-मंतर, रामलीला मैदान, इंडिया गेट, सेंट्रल और पुरानी दिल्ली जैसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्रों में किसी भी तरह के विरोध मार्च या रैलियों की अनुमति न दी जाए।
विरोध स्थल को शहर के बाहरी इलाकों में स्थानांतरित करने की अपील, सीएआईटी ने कहा—व्यापार और लोकतंत्र में संतुलन जरूरी
व्यापारिक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों और आम लोगों की रोजी-रोटी को बाधित करने के लिए नहीं होना चाहिए। सीएआईटी ने राजनीतिक दलों से भविष्य में रैलियों का स्थान तय करते समय व्यापारिक हितों का ध्यान रखने की अपील की है। साथ ही प्रशासन से मांग की गई है कि विरोध-प्रदर्शनों के लिए शहर के बाहरी इलाकों में एक स्थायी स्थल निर्धारित किया जाए ताकि मुख्य बाजारों की आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित होने से बचाया जा सके।

