
सफाई कर्मचारियों की चार प्रमुख मांगें
– सभी सफाई कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए.
– कर्मचारी की मृत्यु होने पर पति या पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए.
-सभी सफाई कर्मचारियों को कम से कम 25 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए.
-सभी कर्मचारियों को स्थायी किया जाए और ठेका व्यवस्था खत्म की जाए.
भोपाल। नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी हड़ताल दूसरे दिन बुधवार को भी जारी रही. वेतन बढ़ाने, स्थायी करने और सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने सहित चार प्रमुख मांगों को लेकर प्रदेशभर के सफाईकर्मी बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही. जिससे शहर के प्रमुख बाजार न्यूमार्केट, चौक बाजार, घोड़ा नक्कास, पुराने शहर के बाजार, 10 नंबर मार्केट, बैरागढ़ सहित अन्य बाजारों में हर जगह कचरे का अंबार लगा दिखाई दिया. वहीं बाजार के सभी मार्गों में जगह जगह कचरे से फैली गंदगी देखने को मिली. यह स्थिति सिर्फ एक दिन की हड़ताल से देखने को मिली है. हालांकि निगम प्रशासन ने प्रमुख बाजारों से कचरा उठाने की व्यवस्था की गई, लेकिन कॉलोनियों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का काम ठप रहा. शहर में प्रतिदिन सफाई व्यवस्था के लिए करीब 7 हजार कर्मचारी काम करते हैं। इनमें 2 हजार नियमित और 5 हजार विनियमित कर्मचारी शामिल हैं, जिन्हें 25 से 29 दिन के आधार पर काम मिलता है। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से निगम के सामने सफाई व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है.
25 हजार रुपए वेतन का आदेश दो हड़ताल समाप्त: मगन झांझोट
अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मगन लाल झांझोट ने बताया कि सफाई कर्मचारियों की हड़ताल लगातार जारी रहेगी. जो छोटी-छोटी तहसीलें अब तक आंदोलन से नहीं जुड़ पाई थीं, वे भी कल से इसमें शामिल हो जाएंगी। प्रदेश की सभी 374 तहसीलों, 16 नगर निगमों, 10 संभागों और 57 जिलों में आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव संजय दुबे, नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे और नगर निगम कमिश्नर से चर्चा हुई है। अधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को पहले जीएडी (सामान्य प्रशासन विभाग), फिर नगरीय प्रशासन विभाग और इसके बाद कैबिनेट तक पहुंचाया जाएगा। हालांकि, इस प्रक्रिया से कर्मचारी संतुष्ट नहीं हैं। झांझोट ने कहा कि अधिकारियों से रातोंरात बैठक कर वित्त विभाग और जीएडी के साथ चर्चा करने का आग्रह किया गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कर्मचारियों को 25 हजार रुपये मासिक वेतन देने का आदेश जारी कर दिया जाता है, तो वे हड़ताल समाप्त करने के लिए तैयार हैं.
कर्मचारियों में वेतन विसंगतियां
मगन झंझोट ने बताया कि हमारे सफाई कर्मचारी सभी कार्यांे को अपनी जिम्मेदारी के साथ करते हैं चाहे मरे हुए जानवर को उठाना हो या सीवेज के अंंदर जाकर कार्य करना है जिसमें जान का जोखिम तक रहता है. उसके बाद भी कभी पीछे नहीं हटे. लेकिन सरकार ने अस्थाई, विनियमित,25 दिवसीय, 29 दिवसीय जैसे नाम देकर भर्ती कर रखे है. जिनका वेतन 10,500 रुपए है. वहीं नियमित कर्मचारियों का वेतन 40 हजार से अधिक है. जब कार्य एक जैसा कर रहे हैं तो फिर यह वेतन विसंगतियां क्यों है.
-7 हजार का कार्य 4 सौ कर्मचारियों ने संभाला
वैसे शहर की सफाई व्यवस्था में प्रतिदिन 7 हजार कर्मचारी कार्य करते हैं. जिससे शहर के सभी कालोनियों और बाजार से सफाई के साथ ही कचरा उठाने, सीवेज का कार्य, नालियों की सफाई सहित अन्य कार्य होते हैं. हड़ताल के कारण नगर निगम अधिकारियों ने व्यवस्था संभालने के लिए 17 गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन, गार्डन, वाटर सप्लाई विभाग, न्यू मार्केट में काम करने वाले एनजीओ, महिला स्व-सहायता समूहों के करीब 400 आउटसोर्स कर्मचारियों को काम पर लगाया। जिनसे मैजिक, बड़ी व मिनी ट्रकों की मदद से सफाई कराने का प्रयास किया गया.
-323 की जगह 40 कचरा वाहन रहे संचालित
शहर में प्रतिदिन चलने वाली करीब 323 कचरा कलेक्शन गाडिय़ों के संचालन पर भी हड़ताल का असर पड़ा. यह वाहन दिन में दो से तीन फैरे अलग अलग कॉलोनियों में डोर-टू-डोर कलेक्शन का कार्य करते थे जो व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही. इनकी जगह निगम ने त्यौहारों के चलते बाजारों बढ़ती भीड़ को सफाई व्यवस्था से राहत देने 40 कचरा वाहनों को लगाया गया. जो कि अपर्याप्त रहे. इन सभी व्यवस्थाअें के बाद भी सभी बाजारों में कचरे का ढेर लगा रहा.
-16 नगरीय निकायों और 374 नगर परिषदों के कर्मचारी शामिल
यूनियन का दावा है कि प्रदेश के 16 नगरीय निकायों और 374 नगर परिषदों के एक लाख से अधिक कर्मचारी आंदोलन में शामिल हैं. सफाईकर्मियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों को पूरा करने के लिए तैयार नहीं होती, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे. भोपाल में इसे सफाई कर्मचारियों की अब तक की सबसे बड़ी हड़तालों में से एक माना जा रहा है.
