
कोतमा, देशभर में करीब 220 करोड़ रुपये के कथित सीएसआर मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच अब मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के जमुना-कोतमा क्षेत्र तक पहुंच गई है। मंगलवार को सीआईडी मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने कोतमा में दस्तक देकर मामले से जुड़े डॉक्टर, एसईसीएल के सीएसआर विभाग और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका की पड़ताल शुरू की। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। जांच एजेंसी द्वारा संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
स्वास्थ्य विभाग और एसईसीएल के सीएसआर कार्यालय को नोटिस
सूत्रों के अनुसार, सीआईडी मुंबई क्राइम ब्रांच ने अनूपपुर स्वास्थ्य विभाग को सीएसआर परियोजनाओं के स्वास्थ्य शिविर लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अनूपपुर के डीटीओ और सीएचएमओ को भी नोटिस जारी किए जाने की जानकारी है। इसके अलावा एसईसीएल जमुना-कोतमा क्षेत्र के सीएसआर कार्यालय को भी जांच के सिलसिले में नोटिस दिया गया है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित एनजीओ और कंपनियों को सीएसआर परियोजनाओं के लिए किस आधार पर मंजूरी दी गई, स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन वास्तव में हुआ या नहीं और स्वीकृत राशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों के लिए किया गया अथवा नहीं।
₹3.87 करोड़ की सीएसआर राशि की मंजूरी पर सवाल
जानकारी के अनुसार, एसईसीएल बिलासपुर जोन के माध्यम से करीब 3.87 करोड़ रुपये की सीएसआर राशि मंजूर की गई थी। इस राशि से रायगढ़, अनूपपुर, सूरजपुर और बिलासपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए थे। अब इन शिविरों के आयोजन, संबंधित संस्थाओं और फंड के उपयोग को लेकर जांच की जा रही है।
मामले के तार झारखंड, ओडिशा, गुजरात और छत्तीसगढ़ तक जुड़े होने की बात सामने आ रही है। आरोप है कि विभिन्न राज्यों में एनजीओ के नाम पर सीएसआर राशि के आवंटन और उपयोग में गड़बड़ी की गई। जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय गतिविधियों और लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी है।
डॉक्टर अंसारी और प्रोजेक्ट मैनेजर से पूछताछ की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, कोतमा के डॉक्टर अंसारी पर आरोप है कि उन्होंने संबंधित कंपनी के माध्यम से काम करते हुए कुछ राशि तीसरे व्यक्ति के बैंक खाते में स्थानांतरित की। इस संबंध में संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी कर जांच में सहयोग करने के लिए कहा गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
सीआईडी इंस्पेक्टर सईद ने अनूपपुर के प्रोजेक्ट मैनेजर से संपर्क कर नोटिस जारी करने की बात कही है। मैनेजर का कहना है कि उन्होंने फरवरी माह से ही संबंधित कंपनी की नौकरी छोड़ दी थी और वर्तमान मामले के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
वहीं, योगिता बोरकर, जो अनूपपुर और बिलासपुर जोन की सीएसआर गतिविधियों का नेतृत्व करती रही हैं, उन्हें भी सीआईडी की ओर से नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पुराने मामले की जांच से जुड़े स्थानीय तार
गौरतलब है कि इस मामले में पहले ईडी की जांच में करीब 220 करोड़ रुपये के सीएसआर फंड से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ था। जांच में फर्जी डॉक्टर बनकर एनजीओ और ट्रस्टों के माध्यम से सीएसआर फंड हासिल करने तथा विभिन्न कंपनियों और बिचौलियों के जरिए राशि के कथित दुरुपयोग के आरोप सामने आए थे।
अब इस मामले की जांच के तार अनूपपुर जिले के जमुना-कोतमा क्षेत्र तक पहुंचने से एसईसीएल की सीएसआर गतिविधियां और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी
एनओसी जांच के महत्वपूर्ण बिंदु बन गए हैं। सीआईडी मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच जारी है। नोटिस प्राप्त व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
इनका कहना है।
सीएसआर मद घोटाले से जुड़े लोग को कारण बताओ नोटिश जारी कर उनसे पूछताछ की जाएगी। कुछ लोगों को नोटिस दी गई है। बाकी ऑफिशियल जानकारी आप हमारे कार्यालय से ले लीजिए।
मो. सईद, इंस्पेक्टर सीआईडी मुंबई,
