इंदौर: इंदौर नगर निगम 4 साल पहले स्वीकृत मास्टर प्लान की 23 सड़कों में से आज तक एक भी सड़क का निर्माण कार्य पूरा नहीं कर सका है. नगर निगम ने करीब चार साल पहले महापौर परिषद की बैठक में निगम सीमा में शामिल 29 गांवों को जोड़ने के लिए इन सड़कों के निर्माण का निर्णय लिया था. 1000 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में 468 करोड़ रुपए केंद्र सरकार की सहायता राशि है, जबकि शेष राशि प्रदेश सरकार और नगर निगम को वहन करनी है.
जनता भुगत रही सजा
नगर निगम ने ढाई साल पहले दो चरणों में 18 सड़कों का निर्माण कार्य आनन-फानन में शुरू तो कर दिया था. पहले चरण में 10 और दूसरे चरण में 8 सड़कों पर जेसीबी और बुलडोज़र चलाकर उन्हें खोद दिया गया, लेकिन आज तक इनमें से एक भी सड़क का काम मुकम्मल नहीं हुआ. सभी 18 सड़कें अधूरी और खस्ताहाल पड़ी हैं. इन अधूरी सड़कों और उड़ती धूल के कारण शहर की यातायात व्यवस्था का रोज़ कचूमर निकल रहा है. घंटों जाम में फंसना और दुर्घटनाओं का शिकार होना अब इंदौर की जनता की नियति बन चुका है.
1000 करोड़ का प्रोजेक्ट, फिर भी कछुआ चाल
गौरतलब है कि करीब चार साल पहले महापौर परिषद की बैठक में मास्टर प्लान की इन 23 सड़कों को बनाने का ढिंढोरा पीटा गया था. निगम सीमा में 29 गांवों के शामिल होने के बाद इन सड़कों को शहरी क्षेत्र का हिस्सा बनाया गया था. निगम ने इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत 1 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी थी, जिसमें से 468 करोड़ रुपए केंद्र सरकार से सहायता राशि के रूप में मिलने हैं और बाकी की रकम प्रदेश सरकार व निगम को उठानी है. पहले इन सड़कों के निर्माण का जिम्मा इंदौर विकास प्राधिकरण के पास था, लेकिन निगम ने नियमों का हवाला देकर यह काम अपने हाथ में ले लिया. अब नतीजा सबके सामने है, ना काम पूरा हो रहा है और ना ही जनता को राहत मिल रही है.
कारण कई्, लेकिन समाधान एक भी नहीं
अधूरे काम के बारे में बताया जा रहा है कि शहर में निर्माणाधीन सड़कों का काम बहुत धीमी गति से चलने का कारण निगम कोष में पैसों की कमी है. दूसरा कारण मास्टर प्लान सड़कों पर लंबाई-चौड़ाई, नर्मदा, ड्रेनेज लाइन शिफ्टिंग और अतिक्रमण हटाने एवं पेड़ों के स्थानांतरण समय पर नहीं होना है, जबकि सभी कार्य निगम के क्षेत्र अधिकार में आते है, इसके बावजूद निगम शहर में सभी निर्माणाधीन सड़कें अधूरी पड़ी है. अधूरी सड़कों के कारण शहर में रोज यातायात जाम हो रहा है. इतना ही नहीं अधूरी सड़कों के कुछ हिस्सों के निर्माण पर से चालकों द्वारा भी फोर व्हीलर जबरन ले जाने से भी यातायात जाम हो जाता है क्योंकि फोर व्हीलर अधूरी सड़कों से निकल नहीं पाता. नतीजा जाम लगता है. कही सड़कों के कुछ हिस्से निगम ने शुरू कर दिए, जिससे अधूरे या गली मोहल्लों से वाहन चालकों द्वारा बंद रास्ते में भी गाड़ी फंसा दी जाती है और नतीजन जाम लग जाता है.
इन 18 सड़कों पर काम है अधूरा
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– टीसीएस-एमआर-5 लिंक रोड
– एमआर-10-एमआर-12 लिंक रोड
– मच्छी बाजार से चन्द्रभागा पुल तक
– जिंसी चौराहे से लक्ष्मीबाई प्रतिमा तक
– नेमीनाथ चौराहे से जिंसी चौराहा
– सांवेर रोड पेट्रोल पंप-शिवशक्ति नगर
– एमआर-5 बड़ा बांगड़दा- पीएमएवाय मल्टी तक
– भमोरी चौराहा-एमआर-10
– राजशाही गार्डन से होटल वॉव भमौरी
– एडवांस एकेडमी से रिंग रोड तक
– एमआर-9 मालवीय नगर से एलआईजी लिंक रोड
– वीर सावरकर प्रतिमा जंजीर वाला चौराहे से अटल द्वार
– नेहरू प्रतिमा मधुमिलन चौराहे से छांवनी पुल तक
– जमजम चौराहा से स्टार चौराहा तक
– मूसाखेड़ी से सांवरिया धाम तक
– किला मैदान रोड से सदर बाजार तक
– होटल प्राइड बायपास आईडीए सिटी फॉरेस्ट तक
– आरई-2 जीआरपी लाइन-आरटीओ नायता मुंडला
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इन सड़कों पर काम शुरू नहीं हुआ
– सुभाष मार्ग गोल मंदिर-रामबाग पुल तक
– एयरपोर्ट रोड थाने से छोटा बांगड़दा एमआर-5 लिंक
– भागीरथपुरा मुख्य मार्ग
– एबी रोड जीपीओ-सरवटे बस स्टैंड तक
– कंडिलपुरा रोड-इंदौर वायर चौराहा वीआईपी रोड
– रिंग रोड खजराना मंदिर द्वार जमजम चौराहे तक
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ठेकेदार एजेंसियों पर कार्रवाई करेंगेः निगम आयुक्त
नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने कहा कि कुछ सड़कों को शीघ्र ही पूरा करने की तैयारी है. कुछ सड़कों में काम धीमी गति से चलने पर ठेकेदार एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई करने जा रहे और निर्माण कार्य में तेजी लाने का प्रयास कर रहे है. शहर की कुछ सड़कें पूरी होने से यातायात में थोड़ी राहत मिल जाएगी.
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अभी तो दो साल और लेगेंगे
इस बारें में निगम जनकार्य प्रभारी राजेंद्र राठौर ने कहा कि अभी तो दो साल ओर लगेंगे. चौड़ी सड़क के कारण स्ट्रॉम, ड्रैनेज और नर्मदा लाइन की शिफ्टिंग भी करना है. 4 ठेकेदार एजेंसी काम कर रही है, उनको भी काम में तेजी लाने का दबाव बनाया हुआ है. इसके बाद भी अभी 60 से 70 प्रतिशत सड़के बन पाई है और यातायात भी चला रहे है. सिंहस्थ के पहले तक ही काम पूरा होगा.
